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Varuthini Ekadashi 2025 Date: कब है वरूथिनी एकादशी? यहां जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, योग और महत्व

Thu, 20 Mar 2025 11:05 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Varuthini Ekadashi 2025 Puja Shubh Muhurat: वरूथिनी एकादशी का व्रत करने से भक्त के जीवन में सुख, समृद्धि और सौभाग्य में वृद्धि होती है। साथ ही, यह व्रत साधक को सभी प्रकार के संकटों से मुक्ति प्रदान करता है। 
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वरूथिनी एकादशी शुभ मुहूर्त - फोटो : amar ujala
Varuthini Ekadashi 2025 Date: सनातन धर्म में वरूथिनी एकादशी का विशेष धार्मिक महत्व है। यह पर्व हर वर्ष वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन विशेष रूप से भगवान लक्ष्मी नारायण जी की पूजा की जाती है और व्रत रखने वाले भक्त मनोवांछित फल की प्राप्ति के लिए उपवास करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, वरूथिनी एकादशी का व्रत करने से भक्त के जीवन में सुख, समृद्धि और सौभाग्य में वृद्धि होती है। साथ ही, यह व्रत साधक को सभी प्रकार के संकटों से मुक्ति प्रदान करता है। व्रत करने वाले को मृत्यु के बाद स्वर्ग और वैकुंठ लोक में स्थान प्राप्त होता है। इस दिन व्रत रखने से व्यक्ति के सभी पाप समाप्त हो जाते हैं और पुण्य की प्राप्ति होती है। वरूथिनी एकादशी का व्रत भगवान की कृपा प्राप्त करने का एक महत्त्वपूर्ण अवसर होता है।

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वरूथिनी एकादशी शुभ मुहूर्त - फोटो : amar ujala
वरूथिनी एकादशी शुभ मुहूर्त
वैदिक पंचांग के अनुसार, वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 23 अप्रैल को शाम 04:43 बजे से प्रारंभ होकर 24 अप्रैल को दोपहर 02:32 बजे तक रहेगी। इस दिन सूर्योदय से तिथि की गणना होती है, जिससे 24 अप्रैल को वरूथिनी एकादशी मनाई जाएगी।
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सावन पुत्रदा एकादशी मंत्र - फोटो : amarujala
वरूथिनी एकादशी पारण समय
वरूथिनी एकादशी का पारण 25 अप्रैल को किया जाएगा। पारण का समय प्रातः 05:46 बजे से लेकर प्रातः 08:23 बजे तक है। इस समय के दौरान व्रती स्नान ध्यान करके, विधिवत पूजा करके व्रत खोल सकते हैं और अन्न व धन का दान कर सकते हैं।

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वरूथिनी एकादशी शुभ मुहूर्त - फोटो : amarujala
वरूथिनी एकादशी पर शुभ योग
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस वर्ष वरूथिनी एकादशी पर ब्रह्म और इन्द्र योग का संयोग बन रहा है, साथ ही शिववास योग भी है। इन शुभ योगों के बीच शतभिषा और पूर्व भाद्रपद नक्षत्र का संयोग होने से यह दिन विशेष रूप से पुण्यकारी माना जाता है। इस समय भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करने से साधक के जीवन में अपार सुख और सौभाग्य की वृद्धि होती है।
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वरूथिनी एकादशी शुभ मुहूर्त - फोटो : freepik
वरूथिनी एकादशी का महत्व 
वरूथिनी एकादशी का विशेष धार्मिक महत्त्व है। यह व्रत भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी के पूजन का दिन है। इस दिन व्रत रखने से व्यक्ति के जीवन में सुख, समृद्धि और सौभाग्य की वृद्धि होती है। इसके अलावा, यह व्रत व्यक्ति के पापों को नष्ट करता है और पुण्य की प्राप्ति कराता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन व्रत करने से साधक को मृत्यु के बाद वैकुंठ लोक में स्थान मिलता है। साथ ही, यह व्रत सभी संकटों से मुक्ति और जीवन में शांति लाने का उपाय है। वरूथिनी एकादशी विशेष रूप से महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि यह पारिवारिक सुख और समृद्धि का प्रतीक है। इस दिन लक्ष्मी नारायण की पूजा करके व्यक्ति धन-धान्य में वृद्धि प्राप्त करता है। इस व्रत को करने से आत्मिक शांति और मोक्ष का मार्ग भी खुलता है।
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वरूथिनी एकादशी शुभ मुहूर्त - फोटो : adobe stock
वरूथिनी एकादशी पूजा विधि
  • पूजा शुरू करने से पहले प्रात:काल जल्दी उठकर स्नान करें और शुद्ध हो जाएं। फिर स्वच्छ वस्त्र पहनें।
  • पूजा की शुरुआत में "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" या "ॐ श्री लक्ष्मीनारायणाय नमः" मंत्र का जाप करें।
  • पूजा स्थल पर दीपक जलाएं और भगवान लक्ष्मी नारायण की मूर्ति या चित्र को स्वच्छ करें।
  • भगवान लक्ष्मी नारायण को ताजे फूल, फल, और पत्तियां अर्पित करें।
  • पूजा के दौरान धूप और अगरबत्तियां जलाएं और वातावरण को पवित्र बनाएं।
  • ध्यान लगाकर भगवान लक्ष्मी नारायण से अपने जीवन में सुख, समृद्धि और सौभाग्य की प्रार्थना करें।
  • इस दिन उपवास रखें। यदि संभव हो तो रात को फलाहार करें।
  • पूजा के बाद, व्रत खोलने से पहले अन्न, धन या वस्त्र का दान करें।
  • इस प्रकार, विधिपूर्वक पूजा करने से जीवन में सुख, समृद्धि और भगवान लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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