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Som Pradosh Vrat 2025: कब है आषाढ़ माह का पहला प्रदोष व्रत ? यहां जानें तिथि और पूजा मुहूर्त

Wed, 11 Jun 2025 02:44 PM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Som Pradosh Vrat 2025: पंचांग के मुताबिक आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 23 जून को देर रात 1 बजकर 21 मिनट पर हो रही है।
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Som Pradosh Vrat 2025 - फोटो : freepik
Som Pradosh Vrat 2025: प्रदोष व्रत हर माह के शुक्ल व कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर रखा जाता है। यह उपवास मुख्य रूप से भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा प्राप्ति के लिए किया जाता है। मान्यता है कि व्रत के प्रभाव से वैवाहिक जीवन सुखमय और रिश्ते मधुर होते हैं। इसके अलावा समस्त दुखों का भी अंत होता है। यह दिन कन्याओं के लिए और भी खास होता है, क्योंकि त्रयोदशी तिथि पर महाकाल को केवल जल चढ़ाने से मनचाहा व योग्य वर की कामना पूर्ण होती हैं। वहीं आषाढ़ माह में यह व्रत 23 जून 2025 को रखा जा रहा है। इस दिन सोमवार का संयोग होने के कारण यह सोम प्रदोष व्रत कहलाएगा। ऐसे में इस दिन के महत्व और पूजा विधि को जानते हैं।
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Som Pradosh Vrat 2025 - फोटो : freepik
कब है आषाढ़ माह का पहला प्रदोष व्रत ?
पंचांग के मुताबिक आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 23 जून को देर रात 1 बजकर 21 मिनट पर हो रही है। इसका समापन 23 जून को रात 10 बजकर 9 मिनट पर है। ऐसे में 23 जून 2025 को प्रदोष व्रत रखा जाएगा।
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Som Pradosh Vrat 2025 - फोटो : freepik
शभ योग 
23 जून 2025 को प्रदोष व्रत के दिन कृत्तिका नक्षत्र बन रहा है, जो दोपहर 3:16 मिनट तक रहेगा। इसपर धृति योग का संयोग बन रहा है, जो दोपहर 1:16 मिनट तक है। इसके बाद शूल योग बनेगा। अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:59 से दोपहर 12:47 तक है। अमृतकाल दोपहर 1:06 से 2: 33 तक है।

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Som Pradosh Vrat 2025 - फोटो : freepik
प्रदोष व्रत पूजा विधि
  • पूजा के लिए सबसे पहले मंदिर में चौकी को रखें।
  • इसपर लाल रंग का साफ वस्त्र बिछा लें।
  • अब इसपर भगवान शिव और मां पार्वती की मूर्ति को रखें।
  • शिवलिंग पर शहद, घी और गंगाजल से अभिषेक करें।
  • इसके बाद कनेर फूल, बेलपत्र और मिठाई का भोग लगाएं।
  • शुद्ध देसी घी का दीप जलाएं और महाकाल के मंत्रों का जाप करें।
  • शिव जी की आरती करें।
  • शिव चालीसा का पाठ करें।
  • अंत में महादेव को भोग लगाई गई मिठाई को प्रसाद के रुप से बांट दें।
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Som Pradosh Vrat 2025 - फोटो : freepik
महामृत्युंजय मंत्र
ऊँ हौं जूं स: ऊँ भुर्भव: स्व: ऊँ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
ऊर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ऊँ भुव: भू: स्व: ऊँ स: जूं हौं ऊँ।।
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Som Pradosh Vrat 2025 - फोटो : freepik
भगवान शिव की आरती

ओम जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव अर्द्धांगी धारा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे। हंसानन गरूड़ासन
वृषवाहन साजे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
अक्षमाला वनमाला मुण्डमालाधारी।
त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक संगे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
मधु कैटव दोउ मारे, सुर भयहीन करे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
लक्ष्मी, सावित्री पार्वती संगा।
पार्वती अर्द्धांगी, शिवलहरी गंगा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
पर्वत सोहें पार्वतू, शंकर कैलासा।
भांग धतूर का भोजन, भस्मी में वासा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
जया में गंग बहत है, गल मुण्ड माला।
शेषनाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवान्छित फल पावे।।
ओम जय शिव ओंकारा।। ओम जय शिव ओंकारा।।

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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