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May Pradosh Vrat 2025: कब रखा जाएगा मई का पहला प्रदोष व्रत, जानें तिथि और पूजा का शुभ मुहूर्त

Thu, 01 May 2025 06:23 AM IST
ज्योति मेहरा ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर मई का पहला प्रदोष व्रत रखा जाएगा। इस व्रत के प्रभाव से जीवन के सभी दोष समाप्त होते हैं और शिव जी की कृपा से इच्छाएं पूर्ण होती हैं। ऐसे में आइए जानते हैं मई का पहला प्रदोष व्रत किस दिन रखा जाएगा।
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mahashivratri 2025 - फोटो : adobe stock
May Pradosh Vrat 2025: हिंदू पंचांग के अनुसार हर माह के शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर मई का पहला प्रदोष व्रत रखा जाएगा। इस बार यह तिथि शुक्रवार को पड़ रही है, जिसके कारण इसे शुक्र प्रदोष कहा जाएगा। प्रदोष व्रत में दिनभर उपवास रखा जाता है और शाम को भगवान शिव की विशेष पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से जीवन के सभी दोष समाप्त होते हैं और शिव जी की कृपा से इच्छाएं पूर्ण होती हैं। ऐसे में आइए जानते हैं मई का पहला प्रदोष व्रत किस दिन रखा जाएगा।

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प्रदोष व्रत 2025 तिथि  - फोटो : adobe stock
प्रदोष व्रत 2025 तिथि 
दृक पंचांग के अनुसार वैशाख शुक्ल त्रयोदशी तिथि का आरंभ 9 मई को दोपहर 2:56 बजे होगा और यह 10 मई शाम 5:29 बजे तक रहेगी। इस आधार पर व्रत 9 मई शुक्रवार के दिन रखा जाएगा।
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प्रदोष पूजा के लिए शुभ मुहूर्त  - फोटो : adobe stock
प्रदोष पूजा के लिए शुभ मुहूर्त 
इस बार शुक्र प्रदोष व्रत पर वज्र योग और हस्त नक्षत्र का संयोग बन रहा है। इस दिन संध्या पूजा के लिए करीब दो घंटे से अधिक का शुभ समय रहेगा। इस दिन प्रदोष समय शाम 07:01 बजे से रात 09:08 बजे तक रहेगा, जिसकी अवधि 02 घण्टे 06 मिनट के लिए रहने वाली है। प्रदोष पूजा के लिए शुभ मुहूर्त इसे ही माना जाता है। 

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शाम को ही क्यों की जाती है प्रदोष व्रत की पूजा? - फोटो : adobe stock
शाम को ही क्यों की जाती है प्रदोष व्रत की पूजा?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार त्रयोदशी तिथि को प्रदोष काल में (सूर्यास्त के बाद जब अंधेरा होने लगता है) भगवान शिव प्रसन्न होकर कैलाश पर नृत्य करते हैं। माना जाता है कि इस समय यदि आप भगवान शिव से जो भी मांगेंगे, वो जरूर मिलता है, इसलिए प्रदोष व्रत में शाम के समय ही पूजा की जाती है। 
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प्रदोष व्रत का महत्व - फोटो : freepik
प्रदोष व्रत का महत्व
पौराणिक कथाओं के अनुसार क्षय रोग होने पर चंद्रदेव ने भगवान शिव की पूजा की थी और शिव जी की कृपा से उनके सभी दोष मिट गए थे। इसी तरह जो लोग प्रदोष व्रत रखते हैं, भगवान उनके सभी दुखों को दूर करते हैं।
 

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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