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Shardiya Navratri 2024 Day 4: नवरात्रि के चौथे दिन क्यों की जाती है मां कूष्मांडा की पूजा? पढ़ें अद्भुत कथा

Sun, 06 Oct 2024 07:16 AM IST
ज्योति मेहरा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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शारदीय नवरात्रि 2024 दिन 4 कुष्मांडा देवी - फोटो : adobe stock
Shardiya Navratri 2024 Day 4 Kushmanda Devi: पूरे देश में नवरात्रि का पर्व धूम धाम से मनाया जा रहा है। नवरात्रि के नौ दिनों में माता रानी के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। इसमें चौथा दिन दुर्गा के नौ रुपों में से चतुर्थ रुप देवी कूष्मांडा की पूजा का विधान है। देवी कुष्मांडा को देवी भागवत् पुराण में आदिशक्ति बताया गया है। इनका निवास सूर्य मंडल के भीतर है। माना जाता है कि यहां निवास करने की शक्ति और क्षमता केवल देवी कूष्मांडा में ही है।

भागवत् पुराण के अनुसार, देवी कुष्मांडा के अंगों की कांति सूर्य के समान ही उज्जवल है। माना जाता है कि देवी कूष्मांडा के प्रकाश से ही दसों दिशाएं प्रकाशित होती हैं। माता कुष्मांडा के स्वरूप की बात करें तो, इनकी आठ भुजाएं हैं, इसलिए इन्हें अष्टभुजा देवी भी कहा जाता है। माता ने अपने आठों हाथों में कमंडल, धनुष, बाण, कमल पुष्प, अमृत से भरा कलश, गदा, चक्र और जपमाला धारण किया हुआ है। मां कुष्मांडा का वाहन सिंह है। सृष्टि निर्माण के समय माता कूष्मांडा ने अपनी मंद हंसी से ब्रह्माण्ड की उत्पत्ती की इसिलए इनका नाम कूष्मांडा पड़ा। 

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शारदीय नवरात्रि 2024 दिन 4 कुष्मांडा देवी - फोटो : adobe stock
देवी कूष्मांडा की कथा
देवी पुराण के अनुसार, सृष्टि के जन्म से पहले अंधकार का साम्राज्य था। उस समय आदिशक्ति जगदम्बा देवी, कूष्मांडा के रुप में सृष्टि की रचना के लिए जरूरी चीजों को संभालकर सूर्य मण्डल के बीच में विराजमान थी। जब सृष्टि रचना का समय आया तो इन्होंने ही ब्रह्मा विष्णु और शिव जी की रचना की। इसके बाद सत्, रज और तम गुणों से तीन देवियों को उत्पन्न किया जो सरस्वती, लक्ष्मी और काली के रूप में पूजी जाती हैं। सृष्टि चलाने में सहायता प्रदान करने के लिए ही देवी काली भी प्रकट हुईं। आदि शक्ति की कृपा से ही ब्रह्मा जी सृष्टि के रचयिता बने और विष्णु पालनकर्ता, वहीं शिव संहारकर्ता बनें।
 
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शारदीय नवरात्रि 2024 दिन 4 कुष्मांडा देवी - फोटो : amar ujala
इसलिए की जाती है चौथे दिन कूष्मांडा देवी की पूजा
पुराणों के अनुसार, तारकासुर के आतंक से जगत को मुक्ति दिलाने के लिए भगवान शिव के पुत्र का जन्म होना जरूरी था। इसलिए भगवान शिव ने देवी पार्वती से विवाह किया। इसके बाद देवताओं ने देवी पार्वती से तारकासुर से मुक्ति के लिए प्रार्थना की, तो माता ने आदिशक्ति का रुप धारण किया और बताया कि जल्दी ही कुमार कार्तिकेय का जन्म होगा जो तारकासुर का वध करेगा।

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शारदीय नवरात्रि 2024 दिन 4 कुष्मांडा देवी - फोटो : adobe stock
माता का आदिशक्ति रुप देखकर देवताओं की शंका और चिंताओं का निदान हो गया। इस रुप में मां भक्तों को यह संदेश देती हैं कि जो भी मां कूष्मांडा का ध्यान और पूजन करेगा उसकी सारी समस्याएं दूर हो जाएंगी। यही वजह है कि नवरात्र के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा का विधान है।
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शारदीय नवरात्रि 2024 दिन 4 कुष्मांडा देवी - फोटो : amar ujala
माता कूष्मांडा का ध्यान मंत्र
वन्दे वांछित कामर्थे चन्द्रार्घकृत शेखराम्।
सिंहरूढ़ा अष्टभुजा कूष्माण्डा यशस्वनीम्॥
भास्वर भानु निभां अनाहत स्थितां चतुर्थ दुर्गा त्रिनेत्राम्।
कमण्डलु, चाप, बाण, पदमसुधाकलश, चक्र, गदा, जपवटीधराम्॥
पटाम्बर परिधानां कमनीयां मृदुहास्या नानालंकार भूषिताम्।
मंजीर, हार, केयूर, किंकिणि रत्नकुण्डल, मण्डिताम्॥
प्रफुल्ल वदनांचारू चिबुकां कांत कपोलां तुंग कुचाम्।
कोमलांगी स्मेरमुखी श्रीकंटि निम्ननाभि नितम्बनीम्॥
 
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