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Shardiya Navratri 2023: नवरात्रि में क्यों नहीं खाना चाहिए प्याज और लहसुन? जानें क्या है इसके पीछे का कारण

Sat, 07 Oct 2023 10:27 AM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

हिंदू धर्म में नवरात्रि ही नहीं बल्कि किसी भी व्रत में लहसुन-प्याज का सेवन वर्जित माना जाता है। शुरुआत से ही लहसुन-प्याज को तामसिक प्रकृति का भोज्य पदार्थ माना जाता है। 
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Shardiya Navratri - फोटो : अमर उजाला
Shardiya Navratri 2023: हिंदू धर्म में नवरात्रि के त्योहार का अधिक महत्व है। साल में दो बार आने वाला ये पर्व हम सभी के लिए खास है। वहीं अश्विन माह में पड़ने वाली शारदीय नवरात्रि का पर्व काफी धूमधाम से मनाया जाता है। इस बार शारदीय नवरात्रि की शुरुआत रविवार 15 अक्तूबर 2023 से हो रही है। 24 अक्तूबर को विजयदशमी का त्योहार मनाया जाएगा। यह पर्व माता रानी की पूजा-अर्चना के लिए समर्पित है। मां दुर्गा को समर्पित यह पर्व पूरे नौ दिनों तक चलेगा। इस दौरान माता रानी के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। नवरात्रि के त्योहार की धूम मंदिर से लेकर पूजा पंडाल व घर-घर में नजर आती हैं। इस दौरान कलश की स्थापना भी की जाती है। साथ ही कुछ लोग इस दौरान अखंड ज्योत भी जलाते है। नवरात्रि में केवल सात्विक भोजन का सेवन करने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा लहसुन और प्याज का परहेज रखने की मान्यता है। हालांकि, ऐसी मान्यता क्यों है? इसका जवाब कम लोग जानते हैं। आइए आज हम आपको विस्तार से इस मान्यता के बारे में बताने वाले हैं।
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क्यों नहीं खाते लहसुन - फोटो : Pixabay
क्यों नहीं खाते लहसुन-प्याज 
हिंदू धर्म में नवरात्रि ही नहीं बल्कि किसी भी व्रत में लहसुन-प्याज का सेवन वर्जित माना जाता है। शुरुआत से ही लहसुन-प्याज को तामसिक प्रकृति का भोज्य पदार्थ माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि, इसके सेवन से अज्ञानता और वासना में बढ़ोतरी होती है। 
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प्याज
वहीं इसका दूसरा कारण है कि, लहसुन-प्याज जमीन के नीचे उगते हैं। इनकी सफाई के दौरान कई सूक्ष्मजीवों की मृत्यु भी होती है। इसलिए भी इन्हें व्रत के दौरान खाना अशुभ माना जाता है। ये अशुद्ध श्रेणी में आते हैं।

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क्यों नहीं खाते लहसुन-प्याज - फोटो : iStock
इसके पीछे वैज्ञानिक कारण भी हैं। दरअसल, शारदीय नवरात्रि  में ठंड के मौसम में आते है। ऐसे में इम्यूनिटी को मजबूत करने के लिए सात्विक खाना खाने की सलाह दी जाती है।
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भगवान विष्णु - फोटो : अमर उजाला।
लहसुन-प्याज से जुड़ी पौराणिक कहानी
आम दिनों में भी भगवान को लगाए जाने वाले भोग को लहसुन-प्याज के बिना बनाया जाता है। इसके पीछे पौराणिक कथा है जिसके अनुसार, समुद्र मंथन में अमृत कलश निकला था। जिसे प्राप्त करने के लिए देवताओं और असुरों की बीच युद्ध छिड़ गया था। उस दौरान भगवान विष्णु ने असुरों और देवताओं में अमृत को समान रूप से बांटने के लिए मोहिनी रूप धारण किया था। लेकिन देवताओं की पंक्ति में राहु-केतु ने बैठकर अमृत पान कर लिया।
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भगवान विष्णु - फोटो : ANI
जब भगवान विष्णु को इस बात का पता चला तो उन्होंने सुदर्शन चक्र से राहु-केतु का सिर धड़ से अलग कर दिया। कहा जाता है इससे निकली खून की बूंदें पृथ्वी पर पड़ीं और इन्हीं बूंदों से लहसुन-प्याज की उत्पत्ति हुई। इसलिए किसी भी पूजा पाठ में लहसुन-प्याज का सेवन करने से परहेज किया जाता है।
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