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Shardiya Navratri 2023: नवरात्रि पर नहीं किए ये 5 काम तो अधूरी रह जाएगी पूजा, जानें विस्तार से

Fri, 06 Oct 2023 12:17 PM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Navratri 2023 Puja: त्योहार कोई भी हो मार्केट में उसकी झलक सबसे पहले देखने को मिलती है। अक्तूबर माह में आने वाली शारदीय नवरात्रि हम सभी के लिए खास है।
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Shardiya Navratri 2023 - फोटो : Amarujala
Navratri 2023 Puja: त्योहार कोई भी हो मार्केट में उसकी झलक सबसे पहले देखने को मिलती है। अक्तूबर माह में आने वाली शारदीय नवरात्रि हम सभी के लिए खास है। इस बार इसकी शुरुआत रविवार 15 अक्तूबर 2023 से हो रही है। वहीं 24 अक्तूबर को विजयदशमी का त्योहार मनाया जाएगा। मां दुर्गा को समर्पित यह पर्व पूरे नौ दिनों तक चलेगा। नवरात्रि में माता रानी के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। हर दिन का अपना अलग महत्व होता है। नवरात्रि के त्योहार की धूम मंदिर से लेकर पूजा पंडाल व घर-घर में नजर आती हैं। इस दौरान कलश की स्थापना भी की जाती है। परिवार के साथ पूजा करते हुए सभी लोग माता रानी का आशीर्वाद भी लेते हैं। साथ ही कुछ लोग इस दौरान अखंड ज्योत भी जलाते है। इस दौरान पूजा के सभी नियमों का विशेष ध्यान रखा जाता है। अक्सर लोग नवरात्रि की पूजा में गलतियां कर देते हैं, जिस पर उनका ध्यान नहीं जाता। इसी कड़ी में आइए उन सभी गलतियों के बारे में विस्तार से जान लेते हैं। 
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हवन - फोटो : istock
नवरात्रि हवन
किसी भी पूजा या उपवास को तब तक पूरा नहीं माना जाता है, जब तक हवन ना किया जाए। नवरात्रि में हवन जरूर करना चाहिए। यह आपके उपवास को पूरा करता है। इसके बिना आपकी पूजा पूर्ण नहीं होगी। हवन करने से मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा भी प्राप्त होती है।
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कलश - फोटो : istock
कलश स्थापना
नवरात्रि पूजा में कलश स्थापना का अपना अलग महत्व है। देवी पुराण के अनुसार, मां भगवती की पूजा से पहले कलश स्थापना जरूरी है। कहा जाता है कि पूजा के दौरान कलश को देवी की शक्ति के प्रतीक के रूप में स्थापित किया जाता है। इसलिए कलश को स्थापित करना ना भूलें। 

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puja - फोटो : istock
आरती करना
आमतौर पर व्यस्त रहने के कारण कुछ लोग आरती किए बगैर ही उपवास रख लेते हैं। हालांकि, यह तरीका गलत है। यदि आप नवरात्रि का उपवास कर रहे हैं तो नियमनुसार आरती करें। इससे आपके व्रत को पूर्ण माना जाता है। 
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मां दुर्गा
माता का श्रृंगार 
आपकी पूजा में माता का 16 श्रृंगार होना बेहद जरूरी है। जिनमें बिंदी, सिंदूर, लाल चूड़ी, मेहंदी, बाजूबंद, हाथ फूल, मांग टीका, झुमके, नथ, काजल, मंगलसूत्र, लाल चुनरी, कमरबंद, कुमकुम, पायल और बिछिया का नाम शामिल है।
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कन्या पूजन - फोटो : istock
कन्या पूजन
नवरात्रि की पूजा में कन्या पूजन बेहद शुभ माना जाता है। वह सभी कन्या देवी के समान होती है। इसलिए अष्टमी या नवमी के दिन कन्या पूजन करना चाहिए। हालांकि, आम दिनों में भी कन्याओं की सेवा करनी चाहिए। यह बेहद खास माना जाता है।
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