कहा जाता है कि एक समय शिंगणापुर गांव में बाढ़ आई और पूरा गांव पानी में डूब गया। बाढ़ के पानी में अजीब-गरीब पत्थर बहकर गांव के अंदर आ गया था। बाढ़ का पानी जब खत्म हुआ तो देखा गया पत्थर पेड़ पर जाकर अटका हुआ था। गांव का एक व्यक्ति उस पत्थर को कीमती जानकर उसे पेड़ से उतारने की कोशिश कर रहा था, पत्थर नुकीली था जब वह किसी चीज से मारकर नीचे गिराना चाह तभी पत्थर से खून निकलना शुरू हो गया। यह देखकर वह व्यक्ति घबरा गया। उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था यह क्या हो गया। उसने पूरी बात गांव वालों को बताई। बात जानकर गांव के लोग भी हैरान हो गया समझ नहीं आ रहा था क्या किया जाए। रात हो गई लेकिन पत्थर वहां से हिला नहीं। फिर गांव वाले अपने-अपने घर चले गए। सुबह गांव के ही एक सज्जन ने बताया सपने में शनिदेव आएं थे। उन्होंने बताया कि मेरी स्थापना कराओ और इस पत्थर को मामा-भांजा की उठा सकते है। गांव वालों ने फिर अगले दिन उस पत्थर की स्थापना करवाई मामा-भांजे ने उस पत्थर को उठाकर रख दिया।