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Shani Jayanti 2019: शिंगणापुर शनि मंदिर मे क्या है मामा-भांजे से कनेक्शन, जानें पूरी कथा

Wed, 29 May 2019 03:14 PM IST
कशिश मिश्रा धर्म डेस्क, अमर उजाला
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शनि शिंगणापुर मंदिर कथा
3 जून को शनि जयंती है। इस दिन शनि देव की विशेष प्रकार से पूजा-अर्चना की जाती है। शनिदेव को न्याय का देवता कहा जाता है। हमारे शास्त्रों के अनुसार शनिदेव को सूर्य का पुत्र भी कहा जाता है। शनि देव आपके कर्मों  के अनुसार आपको फल देते हैं। शनि जयंती के दिन लोग शनि देव के मंदिर जाकर पूरे विधि- विधान से पूजा करते हैं। वैसे तो शनि के पूजा के लिए कई धार्मिक स्थान है लेकिन महाराष्ट्र के पुणे गांव का शनि शिंगणापुर मंदिर पूरे देश में चर्चित हो गया है। वहां दूर-दराज से लोग शनिदेव के दर्शन लिए आते हैं। आइए जानते हैं इस मंदिर से जुड़ी कुछ खास बातों के बारे में...

शनि जयंती के अवसर पर शनि दोष निवारण पूजा (03 जून 2019, सोमवार)
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कहा जाता है कि एक समय शिंगणापुर गांव में बाढ़ आई और पूरा गांव पानी में डूब गया। बाढ़ के पानी में अजीब-गरीब पत्थर बहकर गांव के अंदर आ गया था। बाढ़ का पानी जब खत्म हुआ तो देखा गया पत्थर पेड़ पर जाकर अटका हुआ था। गांव का एक व्यक्ति उस पत्थर को कीमती जानकर उसे पेड़ से उतारने की कोशिश कर रहा था, पत्थर नुकीली था जब वह किसी चीज से मारकर नीचे गिराना चाह तभी पत्थर से खून निकलना शुरू हो गया। यह देखकर वह व्यक्ति घबरा गया। उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था यह क्या हो गया। उसने पूरी बात गांव वालों को बताई। बात जानकर गांव के लोग भी हैरान हो गया समझ नहीं आ रहा था क्या किया जाए। रात हो गई लेकिन पत्थर वहां से हिला नहीं। फिर गांव वाले अपने-अपने घर चले गए। सुबह गांव के ही एक सज्जन ने बताया सपने में शनिदेव आएं थे। उन्होंने बताया कि मेरी स्थापना कराओ और इस पत्थर को मामा-भांजा की उठा सकते है। गांव वालों ने फिर अगले दिन उस पत्थर की स्थापना करवाई मामा-भांजे ने उस पत्थर को उठाकर रख दिया। 
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इस मंदिर की खासियत यह है कि यहां शनि देव किसी मंदिर में विराजमान नहीं है। पत्थर की स्थापना खुले में की गई है क्योंकि वहां के लोगों का मानना है कि शनि देव का छत आसमान है। संगमरमर से बने पत्थर पर शनि देव विराजमान है। 

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सदियों पुरानी इस शनि मंदिर में महिलाएं तेल से अभिषेक नहीं कर सकती थी लेकिन अब इस परंपरा को तोड़ दिया गया है। महिलाएं यहां तेल से अभिषेक कर सकती है। पुरुष वहां पीले रंग का पीताम्बर पहनने के बाद भी शनिदेव का पूजा प्रारंभ करते हैं। पूजा की यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। 
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इस गांव में किसी बैंक के अंदर ताले तो दूर दरवाजे भी नहीं लगे है। वहां के स्थानीय लोगों का मानना है कि उनके समान की रक्षा स्वंय शनि भगवान करते हैं। शनिदेव की डर से कोई चोर चोरी करने भी नहीं आता है। कहते हैं चोरी करने के बाद कोई इंसान गांव से बाहर नहीं जा पाता है। उसे खून की उल्टियां होने लगती है। 

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