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Sawan Pradosh Vrat 2025: सावन में किस-किस दिन रखा जाएगा प्रदोष व्रत, जानें पूजा विधि और नियम

Mon, 30 Jun 2025 12:43 PM IST
ज्योति मेहरा ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सावन मास स्वयं भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। ऐसे में जब सावन मास में प्रदोष व्रत पड़ता है, तो इसकी धार्मिक और आध्यात्मिक महत्ता और भी बढ़ जाती है। आइए जानते हैं कि सावन में प्रदोष व्रत किस-किस दिन पड़ने वाला है।
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सावन माह में प्रदोष व्रत का महत्व - फोटो : freepik
Sawan Pradosh Vrat 2025 Dates: प्रदोष व्रत हिंदू धर्म में भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए रखा जाने वाला एक अत्यंत फलदायक व्रत है। यह व्रत हर मास की कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष में आने वाली त्रयोदशी तिथि को आता है। इस दिन प्रदोष काल यानी दिन और रात के संधिकाल में पूजा की जाती है, जो शिव पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

सावन माह में प्रदोष व्रत का महत्व
सावन मास स्वयं भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। इस महीने में शिव भक्ति और व्रत-उपवास का विशेष महत्व होता है। ऐसे में जब सावन मास में प्रदोष व्रत पड़ता है, तो इसकी धार्मिक और आध्यात्मिक महत्ता और भी बढ़ जाती है। शिव भक्त इस अवसर पर व्रत रखकर और संध्या के समय शिवलिंग की विधिपूर्वक पूजा कर विशेष पुण्य और शिव कृपा प्राप्त करते हैं।
 

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सावन प्रदोष व्रत 2025 की तिथियां - फोटो : अमर उजाला
सावन प्रदोष व्रत 2025 की तिथियां
इस बार सावन माह 11 जुलाई से आरंभ होकर 9 अगस्त तक चलेगा। इस दौरान दो प्रमुख प्रदोष व्रत आएंगे। पहला प्रदोष व्रत सावन कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 22 जुलाई 2025, मंगलवार को भौम प्रदोष व्रत के रूप में रखा जाएगा। दूसरा व्रत सावन शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 6 अगस्त 2025, बुधवार को बुध प्रदोष व्रत के रूप में रखा जाएगा।
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प्रदोष व्रत की विधि - फोटो : adobe stock
प्रदोष व्रत की विधि
  • सुबह स्नान करके साफ वस्त्र धारण करें और शिवलिंग या घर के मंदिर में बैठकर व्रत का संकल्प लें। संकल्प लेते समय भगवान शिव से व्रत की सफलता की प्रार्थना करें।
  • इस दिन फलाहार (फल और दूध आदि) लेकर उपवास किया जा सकता है। कुछ भक्त निर्जल उपवास भी करते हैं।
 

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प्रदोष व्रत की विधि - फोटो : अमर उजाला
  • पूजा के लिए बेलपत्र, गंगाजल, दूध, दही, शहद, घी, चंदन, भस्म, धतूरा, आक, पुष्प, धूप-दीप, नैवेद्य आदि एकत्र करें।
  • प्रदोष काल में शिवलिंग पर अभिषेक करें। इस दौरान मंत्र जाप और स्तोत्र पाठ करें।
  • आप शिव पंचाक्षरी मंत्र "ॐ नमः शिवाय", महामृत्युंजय मंत्र का जाप,  शिव चालीसा, रुद्राष्टक, लघु रुद्र पाठ आदि का पाठ कर सकते हैं।
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प्रदोष व्रत का पारण कब करें - फोटो : अमर उजाला
प्रदोष व्रत का पारण कब करें
प्रदोष व्रत का पारण अगले दिन किया जाता है। व्रत के दूसरे दिन सुबह स्नान करके भगवान शिव की पूजा करें। इसके बाद ब्राह्मण या जरूरतमंद को भोजन या दान देने के बाद व्रत का पारण करें।
 

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

 


 
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