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Sakat Chauth 2025 Puja Vidhi: सकट चौथ पर इस खास विधि से करें भगवान गणेश की पूजा, दूर होंगे सभी कष्ट

Sat, 04 Jan 2025 01:48 AM IST
श्वेता सिंह ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Sakat Chauth Puja Upay: धार्मिक मान्यता के अनुसार महिलाएं अपनी संतान की लंबी उम्र के लिए संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखती हैं। संकष्टी चतुर्थी का व्रत गणेश जी को समर्पित है। आइए जानते हैं नए साल में संकष्टी चतुर्थी कब है और इसका क्या महत्व है।
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सकट चौथ 2025 - फोटो : amar ujala
How To So Sakat Chauth Puja: हर माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी का व्रत किया जाता है। पंचांग के अनुसार माघ माह में कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी मनाई जाने वाली है। इस दिन भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा और व्रत किया जाता है। बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में इस संकष्टी चतुर्थी को तिलवा और तिलकुटा कहा जाता है। यह व्रत महिलाएं अपनी संतान की लंबी उम्र और सुखी जीवन के लिए रखती हैं। इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखकर और रात में चंद्रमा को अर्घ्य देकर अपना व्रत खोलती हैं।

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सकट चौथ 2025 - फोटो : PTI
संकष्टी चतुर्थी कब है?
पंचांग के अनुसार माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 17 जनवरी को सुबह 04:06 बजे शुरू हो रही है। इसका समापन भी 18 जनवरी को सुबह 5:30 बजे होगा। इस कारण संकष्टी चतुर्थी व्रत उदय तिथि के अनुसार 17 जनवरी शुक्रवार को मनाया जाएगा।
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सकट चौथ 2025 - फोटो : PTI
संकष्टी चतुर्थी पर चंद्रोदय का समय
संकष्टी चतुर्थी के दिन चंद्रमा की पूजा करने के बाद ही यह व्रत पूरा माना जाता है। इस दिन चंद्रोदय का समय रात 9:09 बजे है।

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सकट चौथ 2025 - फोटो : PTI
पूजा विधि
संकष्टी चतुर्थी का व्रत करने के लिए ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना चाहिए।
इसके बाद संकष्टी चतुर्थी व्रत का संकल्प करना चाहिए।
फिर लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर गणपति की मूर्ति स्थापित करें।
इसके बाद उस पर कुमकुम लगाएं और घी का दीपक जलाएं।
फिर भगवान गणेश की मूर्ति पर फूल, फल और मिठाइयां चढ़ाएं।
इस पूजा में तिलकुट का प्रसाद अवश्य शामिल करना चाहिए।
इस दिन नियमित रूप से गणेश चालीसा का पाठ करें।
पूजा के अंत में गणेश जी की आरती करें और शंख का आह्वान करें और प्रसाद खाकर इस व्रत का पारण करें।
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सकट चौथ 2025 - फोटो : freepik
संकष्टी चतुर्थी का महत्व
संकष्टी चतुर्थी का व्रत विघ्नहर्ता गणपति को समर्पित है। इस दिन महिलाएं व्रत रखती हैं और अपने बच्चों की लंबी उम्र और सफल भविष्य के लिए प्रार्थना करती हैं। संकष्टी चतुर्थी के दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं। रात को चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही यह व्रत खोला जाता है। इसलिए संकष्ट चतुर्दशी के दिन चंद्रमा के दर्शन और पूजन का विशेष महत्व हो गया। इस दिन गणपति की पूजा में तिल के करछुल या मिठाई रखें और चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत खोलें।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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