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kawad yatra 2019 : भोले की भक्ति में डूबने से पहले जरूर जान लें कांवड़ यात्रा के नियम

Wed, 17 Jul 2019 08:37 AM IST
Madhukar Mishra धर्म डेस्क, अमर उजाला
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कांवड़ यात्रा 2019 - फोटो : PTI
सनातन परंपरा में श्रावण मास में की जाने वाली कांवड़ यात्रा का बहुत महत्व है। हर साल लाखों श्रद्धालु सुख-समृद्धि की कामना लिए इस पावन यात्रा के लिए निकलते हैं। श्रावण के महीने में कांवड़ लेकर जाने और शिवलिंग पर जल चढ़ाने की परंपरा होती है। भगवान शिव को समर्पित इस कांवड़ यात्रा में श्रद्धालु पवित्र गंगा जल या फिर किसी नदी विशेष के शुद्ध जल से अपने ईष्ट देव का जलाभिषेक करते हैं। जलाभिषेक से प्रसन्न होकर भगवान शिव अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं, लेकिन ध्यान रहे कांवड़ यात्रा के कुछ नियम भी होते हैं, जिन्हें तोड़ने पर न सिर्फ यह यात्रा अधूरी रह जाती है।

कांवड़ यात्रा के नियम जानने के लिए आगे की स्लाइड क्लिक करें — 
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कांवड़ यात्रा 2019
कांवड़ यात्रा के दौरान बगैर स्नान किए कांवड़ को स्पर्श करना मना होता है, इसलिए नहाने के बाद ही अपना कांवड़ लेकर आगे बढ़ें। 
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कांवड़ यात्रा 2019
भगवान शिव को समर्पित इस यात्रा के दौरान कभी भी कांवड़ को जमीन पर नहीं रखा जाता है। यदि कहीं शौच, विश्राम आदि के लिए रुकना ही पड़ जाए तो इसे पेड़ आदि ऊंचे स्थानों पर रखा जाता है। 

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कांवड़ यात्रा 2019
कांवड़ यात्रा के दौरान पवित्रता का पूरा ख्याल रखें और कांवड़ यात्रा के दौरान चमड़े से बनी किसी चीज का न तो प्रयोग करें और न ही स्पर्श करें। 
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कांवड़ यात्रा 2019
कांवड़ को सिर के ऊपर रखकर ले जाना वर्जित है।  इसके अलावा किसी वृक्ष या पौधे के नीचे कांवड़ को रखना मना है।
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कांवड़ यात्रा 2019
भोले के भक्तों को कांवड़ यात्रा के दौरान गलत शब्दों का प्रयोग, क्रोध और विवाद नहीं करना चाहिए।
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कांवड़ यात्रा 2019
कांवड़ यात्रा के दौरान बोल बम और जय शिव-शंकर का जयकारा या फिर शिव मंत्रों का जप या मनन करें।

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बागपत के शिविर में बल्लियों पर कांवड़ लगाता शिव भक्त। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
कांवड़ यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार का नशा जैसे मांस, मदिरा, भांग आदि का सेवन न करें। इस पावन यात्रा के दौरान भूलकर भी तामसिक भोजन न करें।
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कांवड़ यात्रा 2019
कांवड़ यात्रा के इन तमाम नियमों के पालन साथ भगवान शिव के प्रति श्रद्धा एवं भक्ति भाव होना सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। शुचिता, पवित्रता और संकल्प के साथ की गई इस यात्रा से प्रसन्न होकर कल्याण के देवता भगवान शिव अपने भक्तों पर अवश्य कृपा करते हैं और उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। 
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