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Rangbhari Ekadashi 2025: कब है रंगभरी एकादशी? जानें शुभ मुहूर्त और पारण समय

Fri, 28 Feb 2025 11:26 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Rangbhari Ekadashi Shubh Muhurat: पौराणिक कथा के अनुसार, फाल्गुन की इस एकादशी पर भगवान शिव ने माता पार्वती को काशी ले जाकर उन्हें गुलाल अर्पित किया था। इसी कारण इस एकादशी को रंगभरी एकादशी के नाम से जाना जाता है।
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रंगभरी एकादशी 2025 - फोटो : amar ujala
Rangbhari Ekadashi Kab Hai: हर महीने के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर व्रत का आयोजन किया जाता है। फाल्गुन माह में मनाई जाने वाली एकादशी को रंगभरी एकादशी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत को करने से साधक सभी पापों से मुक्त हो जाता है। 
पौराणिक कथा के अनुसार, फाल्गुन की इस एकादशी पर भगवान शिव ने माता पार्वती को काशी ले जाकर उन्हें गुलाल अर्पित किया था। इसी कारण इस एकादशी को रंगभरी एकादशी के नाम से जाना जाता है। आइए, इस लेख में हम आपको रंगभरी एकादशी की तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त, और व्रत पारण का समय बताएंगे।

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रंगभरी एकादशी 2025 - फोटो : अमर उजाला
रंगभरी एकादशी तिथि कब? 
फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि आरंभ:  09 मार्च, रात्रि 07: 45 मिनट से  
फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि समाप्त: 10 मार्च, प्रातः 07: 44 मिनट पर  
इस प्रकार से 10 मार्च को रंगभरी एकादशी व्रत किया जाएगा।
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रंगभरी एकादशी 2025 - फोटो : instagram
रंगभरी एकादशी शुभ मुहूर्त 
ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04:59 मिनट से 05:48 मिनट तक
विजय मुहूर्त - दोपहर 02:30 मिनट से 03:17 मिनट तक
गोधूलि मुहूर्त - सायं 06: 24 मिनट से 06:49 मिनट तक
निशिता मुहूर्त - रात्रि 12: 07 मिनट से 12:55 मिनट तक

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रंगभरी एकादशी 2025 - फोटो : instagram
रंगभरी एकादशी 2025 व्रत पारण समय 
रंगभरी एकादशी व्रत पारण का शुभ मुहूर्त:  11 मार्च, प्रातः 06:35 मिनट से 08:13 मिनट तक है। 
रंगभरी एकादशी व्रत का पारण करने के बाद श्रद्धा अनुसार अन्न और धन समेत आदि चीजों का दान करना चाहिए। धार्मिक मान्यता है कि दान करने से साधक को जीवन में किसी भी चीज की कमी का सामना नहीं करना पड़ता है।
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रंगभरी एकादशी 2025 - फोटो : Adobe stock
रंगभरी एकादशी का महत्व 
रंगभरी एकादशी के दिन भगवान विष्णु के साथ-साथ भोलेनाथ और मां पार्वती की पूजा की जाती है। इस दिन व्रत रखने से सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है। आंवले के पेड़ की भी इस दिन विधिपूर्वक पूजा की जाती है। रंगभरी एकादशी पर किसी मंदिर में आंवला वृक्ष लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके अलावा, इस दिन काशी विश्वनाथ की नगरी वाराणसी में भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना की जाती है। रंगभरी एकादशी के व्रत का पारण करने के बाद श्रद्धा के अनुसार अन्न, धन और अन्य वस्तुओं का दान करना चाहिए।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
 
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