फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Raksha Bandhan 2024: रक्षाबंधन से जुड़ी है एक नहीं अनेक कहानियां, जानिए इससे जुड़े तथ्य

Sun, 11 Aug 2024 12:11 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 8
रक्षाबंधन से जुड़ी रोचक जानकारियां - फोटो : amar ujala
Raksha Bandhan Lok Kathaein: रक्षाबंधन का त्योहार हर साल सावन माह की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। यह त्योहार भाई बहन के प्रेम के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। देशभर में रक्षाबंधन का त्योहार बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। रक्षाबंधन के दिन को श्रावणी पूर्णिमा भी कहा जाता है। सावन पूर्णिमा के बाद भाद्रपद माह शुरू होता है। रक्षाबंधन के दौरान बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है और उसकी लंबी उम्र की कामना करती है। इस बार राखी का पवित्र त्योहार 19 अगस्त 2024 दिन सोमवार को होगा। इस दिन बहन अपने भाई को तिलक लगाती है और राखी बांधती हैं। बदले में, भाई अपनी बहन की रक्षा करने और उसे अपनी क्षमता के अनुसार उपहार देने का वादा करता है। लेकिन क्या आप जानते हैं रक्षाबंधन से जुड़ी कई कहानियां और तथ्य है जो यह बताते हैं कि रक्षाबंधन का त्योहार कब से शुरू हुआ। आइए जानते हैं रक्षाबंधन से जुड़ी लोक कथाओं के बारे में। 
विज्ञापन

2 of 8
रक्षाबंधन से जुड़ी रोचक जानकारियां - फोटो : iStock
राजा बलि और देवी लक्ष्मी की कथा
धार्मिक कथाओं के अनुसार रक्षाबंधन के पावन पर्व को मनाने की शुरुआत माता लक्ष्मी ने की थी। सबसे पहले माता लक्ष्मी ने ही अपने भाई को राखी बांधी थी। धार्मिक कथाओं के अनुसार जब राजा बलि ने अश्वमेध यज्ञ करवाया था तब भगवान विष्णु ने वामन अवतार लेकर राजा बलि से तीन पग धरती दान में मांग ली थीऔर राजा बलि को रहने के लिए पाताल लोक दे दिया। तब राजा बलि ने भगवान विष्णु  से वरदान के रूप में पाताल लोक में रहने का आग्रह किया जिसे विष्णु जी ने स्वीकार कर लिया। तब माता लक्ष्मी राजा बलि के पास भेष बदलकर गईं और उनके पास जाते ही रोने लगीं। राजा बलि ने जब माता लक्ष्मी से रोने का कारण पूछा तो मां ने कहा कि उनका कोई भाई नहीं है इसलिए वो रो रही हैं। राजा ने मां की बात सुनकर कहा कि आज से मैं आपका भाई हूं। माता लक्ष्मी ने तब राजा बलि को राखी बांधी और उनके भगवान विष्णु को मांग लिया है। ऐसा माना जाता है कि तभी से भाई- बहन का यह पावन पर्व मनाया जाता है। 
विज्ञापन

3 of 8
रक्षाबंधन से जुड़ी रोचक जानकारियां - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
यमराज और यमुना की  कथा
रक्षाबंधन से जुड़ी पौराणिक कथा के अनुसार मृत्यु के देवता यमराज और यमुना भाई-बहन थे। एक बार यमुना ने अपने छोटे भाई यमराज को लंबी उम्र देने के लिए रक्षासूत्र बांधा था। तभी से यह परंपरा प्रत्येक श्रावण पूर्णिमा को निभाई जाती है।
 

4 of 8
रक्षाबंधन से जुड़ी रोचक जानकारियां - फोटो : freepik
एक अन्य पौराणिक कथा
एक अन्य  पौराणिक कथा है जिसके अनुसार एक दिन राजा इंद्र और राक्षसों के बीच भयंकर युद्ध छिड़ गया, जिसमें इंद्र हार गए। तब इंद्र की पत्नी ने गुरु बृहस्पति के कहने पर शुचि को इंद्र की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधने का आदेश दिया। इस रक्षा सूत्र के माध्यम से ही राजा इंद्र राक्षसों को पराजित करने में सक्षम थे। तभी से रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाने लगा।
विज्ञापन

5 of 8
रक्षाबंधन से जुड़ी रोचक जानकारियां - फोटो : iStock
महाभारत में राखी
महाभारत युद्ध में पांडवों की जीत सुनिश्चित करने के लिए, श्री कृष्ण ने अपनी सेना की रक्षा के लिए युधिष्ठिर को राखी की रस्म की पेशकश की थी। इसके अलावा कुंती ने राखी को अपने पोते अभिमन्यु से और द्रौपदी ने राखी को श्री कृष्ण से जोड़ा था। 
विज्ञापन

6 of 8
रक्षाबंधन से जुड़ी रोचक जानकारियां - फोटो : amar ujala
ऐतिहासिक कथाएं 
महान कवि और नोबेल पुरस्कार विजेता रवीन्द्रनाथ टैगोर ने बंगाल विभाजन के दौरान हिंदुओं और मुसलमानों के बीच भाईचारे को बढ़ावा देने के लिए रक्षाबंधन मनाया था।
विज्ञापन

7 of 8
रक्षाबंधन से जुड़ी रोचक जानकारियां - फोटो : instagram
राखी और सिकंदर की कहानी
दरअसल, सिकंदर की पत्नी ने हिंदू शासक पुरु को राखी बांधकर उसे अपना भाई बनाया था। एक दिन सिकंदर और हिंदू राजा पुरु के बीच युद्ध छिड़ गया। युद्ध के दौरान पुरु ने राखी के प्रति अपने स्नेह और अपनी बहन से किये गये वादे का सम्मान करते हुए सिकंदर को अपनी जीवनदान दे दिया। 
विज्ञापन

8 of 8
रक्षाबंधन से जुड़ी रोचक जानकारियां - फोटो : iStock
रानी कर्णावती और सम्राट हुमायूं की कहानी
मान्यता है कि राखी बांधने की प्रथा राजस्थान से शुरू हुई। इस कथा के अनुसार मेवाड़ की महारानी कर्णावती ने अपने पति की रक्षा के लिए मुगल राजा हुमायूं को राखी भेजी थी। हुमायूं ने राखी की लाज रखी। तभी से राखी बांधने कि परम्परा शुरू हुई।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। इस लेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें