प्रदोष व्रत पर भक्त नटराज स्तुति का पाठ कर सकते हैं, जो शिव जी के तांडव स्वरूप की स्तुति है। ऐसा माना जाता है कि इस पाठ से साधक को सुख, समृद्धि और मनचाही सफलता का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
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प्रदोष व्रत में करें नटराज स्तुति का पाठ
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Pradosh Vrat 2025: प्रदोष व्रत हर महीने दो बार आता है। यह दिन भगवान शिव की कृपा पाने के लिए बेहद शुभ माना जाता है। इस दिन शिव जी की आराधना विशेष रूप से प्रदोष काल में की जाती है, जो अत्यंत फलदायक मानी जाती है। वैशाख मास के शुक्ल की त्रयोदशी तिथि का प्रारम्भ 9 मई को दोपहर 02:56 बजे होगा और इसका समापन 10 मई शाम 05:29 बजे होगा। ऐसे में 9 मई, शुक्रवार को ही प्रदोष व्रत रखा जाएगा। इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 7:01 बजे से रात 9:08 बजे तक रहेगा। इस अवसर पर भक्त नटराज स्तुति का पाठ कर सकते हैं, जो शिव जी के तांडव स्वरूप की स्तुति है। ऐसा माना जाता है कि इस पाठ से साधक को सुख, समृद्धि और मनचाही सफलता का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
नटराज स्तुति
सत सृष्टि तांडव रचयिता
नटराज राज नमो नमः ।
हे आद्य गुरु शंकर पिता
नटराज राज नमो नमः ॥
गंभीर नाद मृदंगना
धबके उरे ब्रह्माडना ।
नित होत नाद प्रचंडना
नटराज राज नमो नमः ॥
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नटराज स्तुति
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शिर ज्ञान गंगा चंद्रमा
चिद्ब्रह्म ज्योति ललाट मां ।
विषनाग माला कंठ मां
नटराज राज नमो नमः ॥
तवशक्ति वामांगे स्थिता
हे चंद्रिका अपराजिता ।
चहु वेद गाए संहिता
नटराज राज नमोः ॥
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प्रदोष व्रत में रखें इन बातों का ध्यान
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प्रदोष व्रत में रखें इन बातों का ध्यान
अगर आप इस दिन व्रत रख रहे हैं तो कुछ बातों का विशेष ख्याल रखना चाहिए। इन नियमों का पालन करने से व्रत का संपूर्ण लाभ प्राप्त होता है और भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है।