इस दिन है पहला प्रदोष व्रत
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रवि प्रदोष व्रत का महत्व
स्कंद पुराण में प्रदोष व्रत के महत्व का उल्लेख प्राप्त होता है। मान्यता है कि त्रयोदशी तिथि पर शाम के समय यानी प्रदोष काल में भोलेनाथ कैलाश पर खुश होकर नृत्य करते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार प्रदोष काल में शिव पूजा और मंत्र जाप से भोलेनाथ प्रसन्न होकर भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण करते हैं। साथ ही व्यक्ति को सौभाग्य, आरोग्य और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। रवि प्रदोष व्रत रखने से धन, आयु, बल, पुत्र आदि की प्राप्ति होती है। दिन के आधार पर प्रदोष व्रत का महत्व अलग-अलग होता है। रविवार के दिन का प्रदोष व्रत, जो रवि प्रदोष व्रत होता है, इसके करने से लंबी आयु प्राप्त होती है और रोग आदि से मुक्ति भी मिलती है।