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Pitru Paksha Daan: पितृपक्ष में ज़रूर दान करें ये वस्तुएं, 7 पीढ़ियों तक रहेगी खुशहाली

Wed, 03 Sep 2025 11:39 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Pitru Paksha Mein Daan: पितृपक्ष एक ऐसा समय है जब हम अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता प्रकट कर सकते हैं। यह केवल धार्मिक कर्म नहीं, बल्कि आत्मिक संतुलन और पारिवारिक सुख-शांति का मार्ग भी है। यदि हम श्रद्धा भाव से सही वस्तुएं दान करें, तो जीवन की बहुत-सी कठिनाइयां स्वतः दूर होने लगती हैं।
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पितृपक्ष दान - फोटो : अमर उजाला
Pitru Paksha Daan: हिंदू धर्म में पितृपक्ष का विशेष आध्यात्मिक महत्व होता है। यह वह समय होता है जब हम अपने पूर्वजों को श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता के साथ याद करते हैं। मान्यता है कि इस अवधि में पितर यमलोक से धरती पर आते हैं और अपनी संतान की भक्ति-भावना से प्रसन्न होकर उन्हें सुख, समृद्धि और आशीर्वाद प्रदान करते हैं। इसी कारण श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान जैसे कर्म करना इस समय अत्यंत शुभ और फलदायक माना जाता है।
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पितृपक्ष में तिथियों के अनुसार पूर्वजों का श्राद्ध करने से विशेष पुण्य मिलता है। वर्ष 2025 में पितृपक्ष की शुरुआत 7 सितंबर से होगी और समापन 21 सितंबर को। इस पावन अवधि में यदि सही विधि से दान-पुण्य किया जाए, तो परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और पितरों की आत्मा भी तृप्त होती है। आइए जानें कि पितृपक्ष के दौरान किस दिन किन वस्तुओं का दान करना शुभ माना गया है।
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पान का दान - फोटो : freepik.com
पान का दान
पान को देवी लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। पितृपक्ष के दौरान किसी गरीब या ब्राह्मण को पान का दान करने से घर में धन, ऐश्वर्य और समृद्धि बढ़ती है। माना जाता है कि ऐसा करने से धन की कमी जीवन में कभी नहीं आती और आर्थिक स्थिति मज़बूत होती है।
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सरसों और चमेली के तेल का दान - फोटो : AdobeStock
सरसों और चमेली के तेल का दान
इन तेलों से दीपक जलाना और उन्हें दान करना पितरों को विशेष रूप से प्रिय है। विशेषकर श्राद्ध के समय सरसों के तेल का दीप जलाकर पूजा स्थल पर रखें। साथ ही इन तेलों को ब्राह्मणों या ज़रूरतमंदों को दान करें, इससे पितृ संतुष्ट होते हैं और घर से दरिद्रता का नाश होता है।

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दही और चूड़ा दान - फोटो : istock
दही और चूड़ा (पोहा) का दान
श्राद्ध के भोजन में दही और चूड़ा का बड़ा महत्व होता है। किसी ब्राह्मण को प्रेमपूर्वक यह भोजन करवाने से पितरों की आत्मा तृप्त होती है और घर में शांति बनी रहती है। दही का दान विशेष रूप से संतान सुख और पारिवारिक कलह से मुक्ति दिलाता है।
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काले तिल का दान - फोटो : Freepik.com
काले तिल का दान
तर्पण और श्राद्ध की सभी विधियों में काले तिल का प्रयोग अत्यंत आवश्यक होता है। जल में तिल मिलाकर तर्पण करना और काले तिल का दान करना पितृदोष निवारण में सहायक होता है। साथ ही यह संतान से जुड़ी समस्याओं को भी दूर करता है।
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सफेद चावल का दान - फोटो : Adobe stock
सफेद चावल का दान
पितृपक्ष में सफेद चावल को चांदी के समान शुभ माना जाता है। कच्चे सफेद चावल का दान करने से आर्थिक संकट दूर होते हैं और घर में अन्न की कभी कमी नहीं रहती। साथ ही यह कारोबार में वृद्धि और नए अवसर लाता है।
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गौ का दान - फोटो : Adobe Stock
गौ का दान
धार्मिक दृष्टि से गाय का दान सबसे श्रेष्ठ माना गया है। यदि संपूर्ण गाय का दान संभव न हो, तो गौसेवा के लिए योगदान या गौ-आहार का दान भी किया जा सकता है। इससे जीवन में सभी सुखों की प्राप्ति होती है और आत्मिक शांति मिलती है।
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धन का दान - फोटो : amar ujala
स्वर्ण या धन का दान
सोने का दान कलह का नाश करता है और कुंडली में चल रहे पितृदोष को दूर करता है। यदि सोना दान करना संभव न हो, तो उसकी जगह यथाशक्ति धन या पीतल जैसे धातुओं का दान भी समान पुण्य देता है।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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