हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, नागों की उत्पत्ति समुद्र मंथन के समय हुई थी। जब देवता और दानव मिलकर समुद्र मंथन कर रहे थे, तब उसमें से अमृत के साथ-साथ कई विषैले पदार्थ भी निकले थे। इन विषैले पदार्थों को पीने से भगवान शिव का गला नीला पड़ गया था, इसलिए उन्हें नीलकंठ कहा जाता है। इस विष को पीने के बाद भगवान शिव ने इसे अपने शरीर में ही रख लिया था। सनातन धर्म इसको लेकर कई मान्यताएं हैं, जिसको लेकर नागपंचमी का त्योहार मनाया जाता है।