फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Mahashivratri 2025: कब है महाशिवरात्रि ? यहां जानें तिथि शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Fri, 24 Jan 2025 07:00 AM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Mahashivratri 2025 Date: वैसे तो रोजाना घरों में देवों के देव महादेव की पूजा की जाती हैं, लेकिन उनकी विशेष कृपा प्राप्ति के लिए महाशिवरात्रि का दिन बेहद खास माना जाता है। यह पर्व हर साल फाल्गुन मास में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर मनाया जाता है।
विज्ञापन
1 of 6
शिवलिंग की पूजा और अभिषेक करने से जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है, साथ ही महादेव भी प्रसन्न होते हैं। - फोटो : अमर उजाला
Mahashivratri 2025 Date: वैसे तो रोजाना घरों में देवों के देव महादेव की पूजा की जाती हैं, लेकिन उनकी विशेष कृपा प्राप्ति के लिए महाशिवरात्रि का दिन बेहद खास माना जाता है। यह पर्व हर साल फाल्गुन मास में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था, इसलिए इस दिन शिव परिवार की उपासना करने से वैवाहिक जीवन सुखमय का आशीर्वाद प्राप्त होता है, इतना ही नहीं यदि शिवरात्रि पर सच्चे मन भाव से उपवास किया जाए तो मनचाहा वर पाने की कामना भी पूरी होती हैं।

पौराणिक कथाओं की मानें तो महाशिवरात्रि पर भगवान शिव पृथ्वी पर मौजूद सभी शिवलिंग में विराजमान होते हैं, ऐसे में इस दिन शिवलिंग की पूजा और अभिषेक करने से जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है, साथ ही महादेव भी प्रसन्न होते हैं। ऐसे में सवाल यह है कि नववर्ष 2025 में यह पर्व कब मनाया जाएगा ? इस दिन कब और किस विधि से पूजा करनी चाहिए ? आइए इस लेख के माध्यम से यह सभी जानते हैं।
विज्ञापन

2 of 6
उदया तिथि के आधार पर 26 फरवरी 2025 को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाएगा। - फोटो : freepik
कब है महाशिवरात्रि 2025 ?
इस साल फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 26 फरवरी 2025 को सुबह 11 बजकर 08 मिनट से होगी। तिथि का समापन अगले दिन यानी 27 फरवरी 2025 को सुबह 08 बजकर 54 मिनट पर होगा। उदया तिथि के आधार पर 26 फरवरी 2025 को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाएगा।
विज्ञापन

3 of 6
पंचांग के अनुसार  26 फरवरी 2025 को महाशिवरात्रि के दिन श्रवण नक्षत्र बन रहा है - फोटो : freepik
महाशिवरात्रि शुभ योग
पंचांग के अनुसार  26 फरवरी 2025 को महाशिवरात्रि के दिन श्रवण नक्षत्र बन रहा है जो शाम 5 बजकर 08 मिनट तक रहेगा, इस दौरान परिध योग का संयोग भी रहेगा।

4 of 6
ब्रह्म मुहूर्त- 26 फरवरी को प्रात: काल में 05:17 से लेकर 06:05 मिनट तक - फोटो : freepik.com
महाशिवरात्रि पूजा मुहूर्त
  • ब्रह्म मुहूर्त- 26 फरवरी को प्रात: काल में 05:17 से लेकर 06:05 मिनट तक
  • रात्रि प्रथम प्रहर पूजा समय - शाम 06:29 से रात 09 बजकर 34 मिनट तक
  • रात्रि द्वितीय प्रहर पूजा समय - रात 09:34 से 27 फरवरी सुबह 12 बजकर 39 मिनट तक
  • रात्रि तृतीय प्रहर पूजा समय - 27 फरवरी को रात 12:39 से सुबह 03 बजकर 45 मिनट तक
  • रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा समय - 27 फरवरी को सुबह 03:45 से 06 बजकर 50 मिनट तक
विज्ञापन

5 of 6
महाशिवरात्रि पर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने के लिए सुबह ही स्नान कर लें। - फोटो : अमर उजाला
पूजा विधि
  • महाशिवरात्रि पर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने के लिए सुबह ही स्नान कर लें।
  • साफ वस्त्रों को धारण कर लें।
  • अब पूजा के लिए सभी सामग्रियों को एकत्रित कर लें
  • सबसे पहले दूध, दही, घी और शहद से शिवलिंग का अभिषेक करें।
  • अब भोलेनाथ को चंदन,मोली ,पान, सुपारी, अक्षत अर्पित करें।
  • इसके बाद पंचामृत, बिल्वपत्र, धतूरा, नारियल, इत्यादि भी शिवजी को चढ़ाएं।
  • अब देवी पार्वती को फूल अर्पित करें।
  • दीपक जलाएं।
  • शिव जी और माता पार्वती के मंत्रों का जाप करें।
  • शिव चालीसा पाठ करें।
  • शिव जी और माता पार्वती की आरती करें।
  • अंत में पूजा में हुई भूल की क्षमा मांगे और प्रसाद का वितरण करें।
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
शिव जी की आरती - फोटो : freepik
शिव जी की आरती 

ओम जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव अर्द्धांगी धारा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे। हंसानन गरूड़ासन
वृषवाहन साजे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
अक्षमाला वनमाला मुण्डमालाधारी।
त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक संगे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
मधु कैटव दोउ मारे, सुर भयहीन करे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
लक्ष्मी, सावित्री पार्वती संगा।
पार्वती अर्द्धांगी, शिवलहरी गंगा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
पर्वत सोहें पार्वतू, शंकर कैलासा।
भांग धतूर का भोजन, भस्मी में वासा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
जया में गंग बहत है, गल मुण्ड माला।
शेषनाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवान्छित फल पावे।।
ओम जय शिव ओंकारा।। ओम जय शिव ओंकारा।।


 
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें