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Krishna Janmashtami 2025: 15 या 16 अगस्त किस दिन है कृष्ण जन्माष्टमी? यहां जानें व्रत और पूजा की सही तिथि

Fri, 15 Aug 2025 06:58 AM IST
ज्योति मेहरा पं.मनोज कुमार द्विवेदी ज्योतिषाचार्य

सार

इस बार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी कि सही तिथि को लेकर आम जनमानस भ्रम की स्थिति में है। ऐसे में आइए ज्योतिषाचार्य पं.मनोज कुमार द्विवेदी से जानते हैं कि कृष्ण जन्माष्टमी किस दिन मनाई जाएगी...
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Krishna Janmashtami Kab Hai - फोटो : अमर उजाला
krishna janmashtami 2025: इस वर्ष भगवान श्रीकृष्ण का 5252वां जन्मोत्सव मनाया जाएगा। परंपरा के अनुसार, अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का संयोग इस पर्व के लिए महत्वपूर्ण होता है, लेकिन इस बार अष्टमी तिथि दो दिन व्याप्त  रहेगी और रोहिणी नक्षत्र उससे अगली सुबह से आरंभ हो रहा है, जिससे व्रत की तिथि को लेकर भ्रम की स्थिति बन गई है। 

ज्योतिषाचार्य पं.मनोज कुमार द्विवेदी ने बताया कि पंचांग गणना के अनुसार, अष्टमी तिथि 15 अगस्त को रात 11 बजकर 49 मिनट से शुरू होकर 16 अगस्त को रात 9 बजकर 34 मिनट पर समाप्त होगी। यही कारण है कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर आम जनमानस भ्रम की स्थिति में है।

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कृष्ण जन्माष्टमी 2025 - फोटो : Adobe Stock
कब है अष्टमी तिथि?
15 अगस्त को तिथि मध्यरात्रि से ही प्रारंभ हो रही है जबकि श्री कृष्ण का जन्म अष्टमी तिथि के मध्यकाल में हुआ था। अष्टमी दोनों दिन आधी रात को व्याप्त हो तो जन्माष्टमी व्रत और पूजा दूसरे दिन किया जाता है। इस मान से उदया तिथि की अष्टमी ही मान्य है। इस व्रत में अष्टमी के उपवास और पूजन के बाद नवमी के पारण से व्रत की पूर्ति होती है। यानी पारण 17 तारीख को सुबह होगा। इसलिए 16 अगस्त को अष्टमी मान्य है। वैष्णव मत से भी अष्टमी 16 अगस्त को रहेगी।
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कृष्ण जन्माष्टमी 2025 - फोटो : adobe stock
शास्त्रानुसार अर्द्धरात्रि में रहने वाली तिथि अधिक मान्य होती है। किन्तु शास्त्रीय सिद्धांत अनुसार अष्टमी यदि सप्तमी विद्धा (संयुक्त) हो तो वह सर्वर्था त्याज्य होती है।

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कृष्ण जन्माष्टमी 2025 - फोटो : Adobe Stock
पूजा के लिए शुभ मुहूर्त
चूंकि 15 अगस्त को अष्टमी सप्तमी विद्धा (संयुक्त) है। अत: वह शास्त्रानुसार सर्वर्था त्याज्य है। वहीं 16 अगस्त को अष्टमी तिथि नवमीं विद्धा (संयुक्त) है, जो शास्त्रानुसार ग्राह्य है। इसलिए स्मार्त व वैष्णव सभी श्रद्धालुओं को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 16 अगस्त 2025 को ही मनाना श्रेयस्कर रहेगा। पूजा का श्रेष्ठ समय 16 अगस्त की रात 12 बजकर 4 मिनट से 12 बजकर 47 मिनट तक है, जो निशीथ काल कहलाता है और श्रीकृष्ण के जन्म का वास्तविक क्षण माना जाता है। 
 
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कृष्ण जन्माष्टमी 2025 - फोटो : Adobe Stock
रोहिणी नक्षत्र और पारण
वैष्णव परंपरा में रोहिणी नक्षत्र को भी अत्यधिक महत्व दिया जाता है। इस बार रोहिणी नक्षत्र 17 अगस्त की सुबह 4 बजकर 38 मिनट से शुरू होकर 18 अगस्त की सुबह 3 बजकर 17 मिनट तक रहेगा। इसलिए वैष्णव भक्त 16 अगस्त की रात को पूजा करते हुए व्रत का पारण 17 अगस्त को सूर्योदय के बाद करेंगे। वहीं, स्मार्त परंपरा में सूर्योदय पर अष्टमी की उपस्थिति के आधार पर निर्णय लिया जाता है, इसलिए स्मार्त परंपरा वाले उसी दिन व्रत करके 16 अगस्त की रात में ही पारण कर लेंगे।

पं.मनोज कुमार द्विवेदी ज्योतिषाचार्य

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