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Holi 2019 : जानें होलिका की अग्नि का रहस्य, वरदान संग जुड़ा है विज्ञान

Tue, 19 Mar 2019 02:01 PM IST
Madhukar Mishra अनीता जैन, वास्तुविद्
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Holi 2019
होली का संबंध सिर्फ रंगों से नहीं बल्कि अग्नि से भी है। वही अग्निदेव जिनकी पूजा सुख-समृद्धि और सेहत के लिए की जाती है और जिनके बगैर कोई पूजा पूरी नहीं होती है। होली के त्योहार से शिशिर ऋतु की समाप्ति तथा वसंत ऋतु का आगमन होता है। आयुर्वेद के अनुसार दो ऋतुओं के संक्रमण काल में मानव शरीर रोग और बीमारियों से ग्रसित हो जाता है। इस ऋतु में शरीर में कफ की मात्रा बढ़ जाती है और वसंत ऋतु में तापमान बढ़ने पर कफ के शरीर से बाहर निकलने की प्रक्रिया में कफदोष पैदा होता है, जिसके कारण सर्दी, खांसी, सांस की बीमारियों के साथ ही गंभीर रोग जैसे - खसरा, चेचक आदि होते हैं। ऐसे मौसम में अग्नि देव की भूमिका बढ़ जाती है। 
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Holi 2019 - फोटो : amar ujala
मध्यम तापमान होने के कारण यह मौसम शरीर में आलस्य भी पैदा करता है, इसलिए स्वास्थ्य की दृष्टि से होलिका दहन के विधानों में आग जलाना, अग्नि परिक्रमा, नाचना, गाना आदि शामिल किए गए हैं। अग्नि की ताप जहां रोगाणुओं को नष्ट करती है, वहीं खेल-कूद की अन्य  गतिविधियां शरीर में जड़ता नहीं आने देतीं। इससे कफदोष दूर हो जाता है। शरीर की ऊर्जा और स्फूर्ति कायम रहती है एवं शरीर स्वस्थ्य रहता है। 
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Holi 2019
होली के दिन होलिका दहन से पूर्व अग्निदेव की पूजा का विधान है। अग्निदेव पंचतत्वों में प्रमुख माने जाते हैं, जो सभी जीवात्माओं के शरीर में अग्नितत्व के रूप में विराजमान रहते हुए जीवन भर उनकी रक्षा करते हैं। अग्निदेव सभी जीवों के साथ एक समान न्याय करते हैं, इसलिए सनातन धर्म को मानने वाले सभी लोग भक्त प्रहलाद पर आए संकट को टालने और अग्निदेव द्वारा ताप के बदले उन्हें शीतलता देने की प्रार्थना करते हैं। 

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Holi 2019
हमारे सभी धर्मग्रंथों में होलिका दहन में मुहूर्त का विशेष ध्यान रखने की बात कही गई है। नारद पुराण के अनुसार अग्नि प्रज्ज्वलन फाल्गुन पूर्णिमा को भद्रारहित प्रदोषकाल में सर्वोत्तम माना गया है। होलिका दहन के समय परिवार के सभी सदस्यों को एक साथ नया अन्न यानि गेहूं,जौ एवं चना की हरी बालियों को लेकर पवित्र अग्नि में समर्पित करना चाहिए, ऐसा करने से घर में शुभता का आगमन होता है। 
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Holi 2019
धर्मरूपी होली की अग्नि को अतिपवित्र माना गया है, इसलिए लोग इस अग्नि को अपने घर लाकर चूल्हा जलाते हैं और कहीं-कहीं तो इस अग्नि से अखंड दीप जलाने की भी परंपरा है। मान्यता है कि इससे न केवल कष्ट दूर होते हैं, सुख-समृद्धि भी आती हैं।
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