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Pradosh Vrat June 2026: 27 या 28 जून, कब रखा जाएगा प्रदोष व्रत ? जानें सही डेट और पूजा विधि

Thu, 18 Jun 2026 03:19 PM IST
मेघा कुमारी ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला

सार

Pradosh Vrat June 2026: प्रदोष व्रत पर की गई पूजा अत्यंत फलदायी मानी जाती है। कहा जाता है कि, सच्चे मन से इस समय शिव आराधना करने पर पापों का नाश होता है। इसके अलावा मनचाही इच्छाएं पूरी हो सकती हैं। 
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Pradosh Vrat June 2026 - फोटो : अमर उजाला
Pradosh Vrat June 2026: प्रदोष व्रत को महादेव की कृपा पाने के लिए सबसे शुभ माना जाता है। इस तिथि पर विधि-विधान से व्रत रखने और श्रद्धा भाव से पूजा करने पर शंकर जी प्रसन्न होते हैं। पंचांग के अनुसार, प्रदोष व्रत हर माह की त्रयोदशी तिथि पर किया जाता है और इसके प्रभाव से व्यक्ति के जीवन में चल रही परेशानियां, दोष और बाधाएं धीरे-धीरे दूर होने लगती हैं। शास्त्रों के अनुसार, प्रदोष काल वह समय होता है जब भगवान शिव कैलाश पर आनंदित होकर तांडव करते हैं। ऐसे में उनकी आराधना करने का महत्व और भी कई गुना बढ़ जाता है। आइए जानते हैं कि, जून महीने में यह उपवास कब रखा जाएगा।
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Pradosh Vrat June 2026 - फोटो : amar ujala
प्रदोष व्रत कब रखा जाएगा ?
पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 26 जून को रात 10 बजकर 22 मिनट पर होगी। वहीं यह तिथि 28 जून को रात 12 बजकर 43 मिनट तक रहेगी। तिथियों के अनुसार, प्रदोष व्रत 27 जून 2026 शनिवार को रखा जाएगा। शनिवार होने के कारण यह शनि प्रदोष व्रत कहलाया जाएगा। इस दिन प्रदोष काल शाम 7 बजकर 20 मिनट से रात 9 बजकर 29 मिनट तक रहेगा।
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Pradosh Vrat June 2026 - फोटो : freepik
शनि प्रदोष व्रत की पूजा विधि
  • प्रदोष काल में पूजा स्थान पर भगवान शिव और माता की प्रतिमा स्थापित करें।
  • शिवलिंग का पंचामृत से अभिषेक करें, इसके बाद शुद्ध जल भी चढ़ाएं।
  • रोली, बेलपत्र, अक्षत और चंदन महादेव को चढ़ाएं।
  • अब धूप, दीपक और पुष्प अर्पित कर विधिवत पूजा करते हुए ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करें।
  • शनि प्रदोष व्रत है, इसलिए शिवलिंग पर काले तिल या शनिदेव को भी काले तिल चढ़ाएं।
  • शनि प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें और भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें।
  • परिवार की सुख-समृद्धि और जीवन में मंगल की कामना के लिए घर के मुख्य द्वार पर भी दीप जलाएं।
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Pradosh Vrat June 2026 - फोटो : freepik
शिवजी की आरती : ॐ जय शिव ओंकारा

जय शिव ओंकारा ॐ जय शिव ओंकारा ।
ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा ॥ ॐ जय शिव...॥

एकानन चतुरानन पंचानन राजे ।
हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे ॥ ॐ जय शिव...॥

दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे।
त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे ॥ ॐ जय शिव...॥

अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी ।
चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी ॥ ॐ जय शिव...॥

श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे ।
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे ॥ ॐ जय शिव...॥
कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता ।
जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता ॥ ॐ जय शिव...॥

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका ।
प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका ॥ ॐ जय शिव...॥

काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी ।
नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी ॥ ॐ जय शिव...॥

त्रिगुण शिवजीकी आरती जो कोई नर गावे ।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे ॥ ॐ जय शिव...॥

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

 
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