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Jivitputrika Vrat 2025: जितिया व्रत में भूलकर भी न करें ये काम, जानें क्या करें और क्या न करें

Fri, 12 Sep 2025 12:55 PM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Jivitputrika Vrat 2025: पंचांग के मुताबिक हर वर्ष आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जीवित्पुत्रिका का व्रत रखा जाता है। इस दिन सभी महिलाएं संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य, खुशहाल जीवन और तरक्की की कामना के लिए निर्जला उपवास रखती हैं। 
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jitiya vrat - फोटो : freepik
Jivitputrika Vrat 2025: पंचांग के मुताबिक हर वर्ष आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जीवित्पुत्रिका का व्रत रखा जाता है। इस दिन सभी महिलाएं संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य, खुशहाल जीवन और तरक्की की कामना के लिए निर्जला उपवास रखती हैं। यह उपवास सभी व्रतों में कठिन है, क्योंकि इसमें नहाय-खाय, निर्जला उपवास और पारण तक कई परंपराएं निभाई जाती हैं। हालांकि, पर्व में माताएं अपने बच्चों की दीर्घायु के लिए कठोर नियमों का पालन भी करती हैं। इसलिए इस दौरान कुछ गलतियों को करने से बचना चाहिए अन्यथा नकारात्मकता आ सकती है। ऐसे में आइए जानते हैं कि  जितिया व्रत में क्या करें और क्या न करें।
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jitiya vrat - फोटो : freepik

जीवित्पुत्रिका व्रत 2025

  • वर्ष 2025 में इसका आरंभ 13 सितंबर को नहाय-खाय के साथ होगा।
  • इसके बाद 14 सितंबर को महिलाएं पूरे विधि-विधान से जीवित्पुत्रिका व्रत रखेंगी
  • अगले दिन यानी 15 सितंबर को व्रत का पारण कर व्रत संपन्न किया जाएगा।
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jitiya vrat - फोटो : freepik
जितिया व्रत में क्या करें और क्या न करें
  • धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जितिया व्रत का पहला दिन नहाय-खाय का होता है, इसलिए इस दिन सूर्योदय से पहले स्नान करें और सात्विक भोजन ग्रहण करें।
  • जितिया व्रत के तीन दिनों में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें और घर के किसी भी कोने में अंधेरा न रखें।
  • चूंकि यह व्रत निर्जला होता है, इसलिए व्रती को पानी या किसी भी खाद्य पदार्थ का सेवन नहीं करना चाहिए।

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jitiya vrat - फोटो : adobe
  • इस दौरान आप परिवार में कलह, विवाद या झगड़े करने से बचें, इससे घर में नकारात्मकता बढ़ती है।
  • व्रत पारण से पहले किसी भी प्रकार का भोजन करना वर्जित है।
  • धार्मिक मान्यताओं के अनुसार व्रत के दौरान लहसुन, प्याज, मांसाहार आदि का सेवन भूलकर न करें और घर में भी इन्हें न आने दें।
 
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  • जितिया व्रत के मुख्य दिन पर महिलाओं को सूर्योदय से लेकर अगले दिन सूर्योदय तक निर्जला उपवास रखना चाहिए और उसके बाद ही पारण करना चाहिए।
  • इस अवधि में शाम के समय जितिया देवी की पूजा अवश्य करें और उनकी कथा का पाठ करें। यह बेहद शुभ है।
  • इस व्रत में दान का विशेष महत्व है, इसलिए आप अपनी क्षमता के अनुसार अन्न, वस्त्र और जरूरत की वस्तुओं का दान कर सकती हैं।
 

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
 
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