पूजा का आसान क्रम इस तरह रखा जा सकता है:
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पूजा का आसान क्रम इस तरह रखा जा सकता है:
- रात 11:45 बजे लड्डू गोपाल का अभिषेक करें।
- करीब 11:55 बजे कान्हा को नए वस्त्र और आभूषण पहनाएं।
- रात 12 बजे शंख-घंटी के साथ कृष्ण जन्मोत्सव मनाएं।
- इसके बाद जन्म आरती करें।
- माखन-मिश्री, पंजीरी, फल या सात्विक मिठाई का भोग लगाएं।
- अष्टमी तिथि समाप्त होने से पहले पुष्प आदि अर्पित कर सकते हैं।
- 12:13 बजे के बाद पूजा रोकना जरूरी नहीं
अष्टमी तिथि के समाप्त होने का मतलब यह नहीं है कि 12:13 बजे के बाद पूजा तुरंत बंद करनी होगी। दिल्ली में निशीथ काल 12:43 बजे तक बताया गया है। मुख्य जन्म पूजा और आरती अष्टमी तिथि के भीतर करना बेहतर माना जाएगा, लेकिन इसके बाद भी भक्त भजन, मंत्र जाप और आरती कर सकते हैं।