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जन्माष्टमी 2026: रात 12:13 बजे खत्म हो जाएगी अष्टमी तिथि, जानें कब करें लड्डू गोपाल का अभिषेक और आरती

Fri, 04 Sep 2026 06:17 AM IST
ज्योति मेहरा ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला

सार

इस बार अष्टमी तिथि 4 सितंबर को तड़के 2:25 बजे आरंभ होगी और इसी रात 12:13 बजे समाप्त होगी। वहीं निशीथ काल रात 11:57 बजे से 12:43 बजे तक रहेगा। यानी भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की पूजा का निशीथ मुहूर्त जारी रहेगा, लेकिन इसी दौरान अष्टमी तिथि समाप्त हो जाएगी। ऐसे में आइए जानते हैं कि लड्डू गोपाल का अभिषेक, जन्म आरती और भोग किस समय करना उचित रहेगा। 
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जन्माष्टमी 2026: जानें आरती और पूजा का समय - फोटो : AI
इस साल जन्माष्टमी की पूजा को लेकर समय का एक खास संयोग बन रहा है। 4 सितंबर 2026 को जन्माष्टमी मनाई जाएगी और इसी रात 12:13 बजे अष्टमी तिथि समाप्त हो जाएगी। वहीं पूजा के लिए शुभ माना जाने वाला निशीथ काल रात 11:57 बजे से 12:43 बजे तक रहेगा। ऐसे में भक्तों के बीच यह सवाल है कि लड्डू गोपाल का अभिषेक, जन्म आरती और भोग किस समय करना उचित रहेगा? क्या पूजा रात 12:13 बजे ही पूरी कर लेनी चाहिए या अष्टमी तिथि के बाद भी पूजा कर सकते हैं। 

पंचांग के अनुसार, अष्टमी तिथि 4 सितंबर को तड़के 2:25 बजे आरंभ होगी और इसी रात 12:13 बजे यानी 5 सितंबर को समाप्त होगी। वहीं दिल्ली-एनसीआर में निशीथ काल रात 11:57 बजे से 12:43 बजे तक रहेगा। यानी भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की पूजा का निशीथ मुहूर्त जारी रहेगा, लेकिन इसी दौरान अष्टमी तिथि समाप्त हो जाएगी।

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जन्माष्टमी 2026 पर अभिषेक का सही समय - फोटो : Amar Ujala
अभिषेक कब करें?
कम समय होने के कारण पूजा की तैयारियां पहले से पूरी कर लेना बेहतर रहेगा। यदि अभिषेक में समय लगता है तो इसे करीब 11:45 बजे शुरू किया जा सकता है। दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से बाल गोपाल का अभिषेक करें। इसके बाद उन्हें साफ वस्त्र और आभूषण पहनाएं।

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रात 12 बजे करें जन्म आरती - फोटो : Amar Ujala
रात 12 बजे करें जन्म आरती
घर पर जन्माष्टमी की पूजा करने वाले भक्त रात 11:57 बजे से पूजन शुरू कर सकते हैं। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव रात 12 बजे मनाना सबसे शुभ माना जाता है। इसी समय शंख और घंटी बजाकर लड्डू गोपाल की जन्म आरती करें।

चूंकि अष्टमी तिथि रात 12:13 बजे तक ही रहेगी, इसलिए जन्म आरती अष्टमी तिथि के दौरान ही संपन्न करनी होगी। इसके लिए 12:13 बजे तक प्रतीक्षा करने की आवश्यकता नहीं है।

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पूजा का आसान क्रम इस तरह रखा जा सकता है: - फोटो : Amar Ujala
पूजा का आसान क्रम इस तरह रखा जा सकता है:
  • रात 11:45 बजे लड्डू गोपाल का अभिषेक करें।
  • करीब 11:55 बजे कान्हा को नए वस्त्र और आभूषण पहनाएं।
  • रात 12 बजे शंख-घंटी के साथ कृष्ण जन्मोत्सव मनाएं।
  • इसके बाद जन्म आरती करें।
  • माखन-मिश्री, पंजीरी, फल या सात्विक मिठाई का भोग लगाएं।
  • अष्टमी तिथि समाप्त होने से पहले पुष्प आदि अर्पित कर सकते हैं।
  • 12:13 बजे के बाद पूजा रोकना जरूरी नहीं

अष्टमी तिथि के समाप्त होने का मतलब यह नहीं है कि 12:13 बजे के बाद पूजा तुरंत बंद करनी होगी। दिल्ली में निशीथ काल 12:43 बजे तक बताया गया है। मुख्य जन्म पूजा और आरती अष्टमी तिथि के भीतर करना बेहतर माना जाएगा, लेकिन इसके बाद भी भक्त भजन, मंत्र जाप और आरती कर सकते हैं।
 
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व्रत कब खोलें? - फोटो : adobe stock
व्रत कब खोलें?
जन्म आरती के तुरंत बाद व्रत खोलने की परंपरा हर परिवार में एक जैसी नहीं होती। कुछ लोग रात 12 बजे जन्मोत्सव के बाद चरणामृत या फलाहार लेते हैं, जबकि कई भक्त अगले दिन निर्धारित पारण समय पर व्रत खोलते हैं। इसलिए अपनी पारिवारिक परंपरा, संप्रदाय और स्थानीय मंदिर के निर्देश को प्राथमिकता दें।

शहर के अनुसार बदल सकता है पूजा का समय
ध्यान रखें कि ऊपर बताए गए समय दिल्ली और एनसीआर के अनुसार हैं। निशीथ काल की गणना स्थान विशेष के आधार पर होती है। इसलिए मुंबई, जयपुर, कोलकाता, चेन्नई या किसी अन्य शहर में समय में थोड़ा अंतर हो सकता है। पूजा से पहले अपने शहर के पंचांग या स्थानीय मंदिर से समय की पुष्टि जरूर कर लें।

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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