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Holika Dahan Date and Time: होलिका दहन आज, पूजा के लिए क्या है शुभ मुहूर्त, भद्रा और भद्रा पूंछ को लेकर क्या कहते हैं ज्योतिषाचार्य

Thu, 17 Mar 2022 01:20 PM IST
विनोद शुक्ला ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Holika Dahan 2022 Date Timing Shubh Muhurat
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इस बार होलिका दहन के दिन यानी 17 मार्च को भद्रा का साया रहेगा। भद्रा दोष के चलते होलिका दहन शाम के करने के बजाय रात को करना ज्यादा शुभ और फलदायी रहेगा।  - फोटो : अमर उजाला
Holika Dahan Date and Time: आज पूरे देश में होलिका दहन का पर्व मनाया जा रहा है और फिर कल यानी 18 मार्च को रंगों वाली होली खेली जाएगी। हिंदू धर्म में होली का त्योहार बहुत ही धूमधाम और उत्सव के साथ मनाया जाता है। होली के एक दिन पहले होलिका दहन की जाती है और इस दिन के बाद आठ दिनों तक चलने वाला होलाष्टक भी खत्म हो जाता है। इस बार होलिका दहन के दिन यानी 17 मार्च को भद्रा का साया रहेगा। भद्रा दोष के चलते होलिका दहन शाम के करने के बजाय रात को करना ज्यादा शुभ और फलदायी रहेगा। 
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होलिका दहन के समय गीत गाते लोग - फोटो : अमर उजाला
होली पूजा शाम के समय और दहन रात्रि के समय करना शुभ
प्रसिद्धि ज्योतिषाचार्य पं.जय गोविंद शास्त्री के अनुसार इस बार होलिका दहन के दिन गजकेसरी, वरिष्ठ और केदार नाम के तीन राजयोग के चलते पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में होलिका दहन किया जाएगा। ज्योतिषाचार्य पं.जय गोविंद शास्त्री के अनुसार होली का पूजन प्रदोष काल में करना शुभ रहेगा। प्रदोष काल से मतलब सूर्यास्त के बाद का समय। शाम के समय 06 से लेकर 07 बजकर 30 मिनट तक होली का पूजन किया जा सकता है। 
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- फोटो : अमर उजाला
भद्रा पूंछ में होलिका दहन संभव
पं.जय गोविंद शास्त्री के अनुसार भद्रा की समाप्ति के बाद होलिका दहन करना ज्यादा शुभ और फलदायी रहेगा लेकिन 17 मार्च को होलिका दहन भद्रा पूंछ के रहते रात 09 बजकर 06 मिनट से रात 10 बजकर 16 मिनट तक होलिका दहन किया जा सकता है। शास्त्रों में बताया गया है कि भद्रा पूंछ के दौरान होलिका दहन कर सकते हैं।  ऐसे में 17 मार्च को रात 09 बजकर 06 मिनट से होलिका दहन हो सकता है।  भद्रा का समापन देर रात 01 बजकर 22 मिनट पर होगा। अगर लोग भद्रा पूंछ के रहते होलिका दहन नहीं करना चाहते है तो वे देर रात 01:22 बजे से 18 मार्च को सुबह तक कर सकते हैं। ज्योतिषशास्त्र के जानकारों का कहना है कि प्रदोष काल के दौरान भद्रा रहते हुए होली की पूजा की जा सकती है, लेकिन होलिका दहन भद्रा काल के समाप्त होने पर ही करना सर्वश्रेष्ठ रहेगा।  होलिका दहन पर भद्रा काल दोपहर 01 बजकर 21 मिनट से शुरू होकर रात के करीब 01 बजकर 22 मिनट पर खत्म हो जाएगी। ऐसे में 17 मार्च को होलिका दहन का शुभ मुहूर्त रात 01 बजकर 22 मिनट के बाद ही करना शुभ रहेगा।
 
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होलिका दहन - फोटो : अमर उजाला
होलिका पूजन विधि
होलिका दहन में होलिका और भक्त प्रह्लाद की पूजा की जाती है। सर्वप्रथम सभी देवताओं में प्रथम पूज्य गणेश जी का स्मरण कर, जहां पूजा करनी हैं, उस स्थान पर गंगाजल छिड़क कर पवित्र कर लें। संभव हो तो होलिका दहन वाली सामग्री को अग्नि तत्व की दिशा दक्षिण-पूर्व में रखें। पूजा करते समय पूजा करने वाले व्यक्ति को होलिका के पास पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठना चाहिए।पूजन के लिए ताम्बे के एक लोटे में जल, माला, रोली, चावल, गंध, फूल, कच्चा सूत, बताशे-गुड़, साबुत हल्दी, गुलाल, नारियल आदि का प्रयोग करना चाहिए।इसके बाद होलिका में गोबर से बने खिलौने व माला भी रखें।साथ में नई फसल के हरे चने की बालियां व गेहूं की बालियां आदि भी सामग्री के रूप में रख लें। अब कच्चे सूत को होलिका के चारों ओर तीन या सात बार लपेटना चाहिए।
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