माता पार्वती की तपस्या से जुड़ी है परंपरा
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माता पार्वती की तपस्या से जुड़ी है परंपरा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मिट्टी या बालू से शिवलिंग बनाने की परंपरा माता पार्वती की कठोर साधना से जुड़ी हुई है। हरतालिका तीज की कथा में बताया गया है कि माता पार्वती भगवान शिव को अपने पति के रूप में पाना चाहती थीं। इसी बीच जब उनके विवाह की बात भगवान विष्णु से होने लगी, तो माता पार्वती अपनी सखियों के साथ वन की ओर चली गईं।
वन में उन्होंने महादेव को प्राप्त करने के लिए कठिन तपस्या आरंभ की। मान्यता है कि साधना के दौरान उन्होंने अपने हाथों से मिट्टी या रेत का शिवलिंग बनाया और पूरी श्रद्धा के साथ भगवान शिव का पूजन किया। उन्होंने रातभर जागकर तप और आराधना की। उनकी कठोर साधना से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार करने का वरदान दिया।
इसी कथा की स्मृति में हरतालिका तीज पर मिट्टी या बालू से शिवलिंग बनाने की परंपरा मानी जाती है। इस तरह व्रत रखने वाली महिलाएं केवल भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा ही नहीं करतीं, बल्कि माता पार्वती के दृढ़ संकल्प, तपस्या और समर्पण को भी याद करती हैं।