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Hartalika Teej Katha: शुभ योग में हरतालिका तीज आज, यहां पढ़ें व्रत की संपूर्ण कथा

Tue, 26 Aug 2025 06:17 AM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Hartalika Teej Katha: हरतालिका तीज शिव और पार्वती के मिलन प्रेम का प्रतीक है, जिसे भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया पर मनाया जाता है। इस वर्ष 26 अगस्त 2025 को हरतालिका तीज मनाई जा रही है। इस दिन महिलाएं दांपत्य जीवन सुखमय के लिए निर्जला उपवास रखती है।
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Hartalika Teej Katha - फोटो : अमर उजाला
Hartalika Teej Katha: हरतालिका तीज शिव और पार्वती के मिलन प्रेम का प्रतीक है, जिसे भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया पर मनाया जाता है। इस वर्ष 26 अगस्त 2025 को हरतालिका तीज मनाई जा रही है। इस दिन महिलाएं दांपत्य जीवन सुखमय के लिए निर्जला उपवास रखती है। इसके अलावा घरों में मिट्टी से शिव-पार्वती की मूर्ति बनाकर उनकी विधि-विधान से पूजा की जाती है। हालांकि, इस पर्व की खास रौनक पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार में देखने को मिलती हैं। यहां व्रती महिलाएं रात में भजन-कीर्तन व जागरण करते हुए महादेव का पूजन करती हैं। वहीं कन्याएं भी मनचाहा जीवनसाथी पाने के लिए शिवलिंग पर दूध, दही, शहद और गंगाजल से अभिषेक करती हैं। इस दौरान पूजा में हरतालिका तीज के व्रत की संपूर्ण कथा का पाठ अवश्य करना चाहिए। यह लाभकारी होता है। आइए इस कथा के बारे में जानते हैं।
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हरतालिका तीज - फोटो : अमर उजाला

हरतालिका तीज पर पूजा मुहूर्त

  • हरतालिका तीज पर पहला मुहूर्त (ब्रह्म मुहूर्त) सुबह 4 बजकर 27 मिनट से सुबह के 5:12 मिनट तक रहेगा। 
  • दूसरा (अभिजीत मुहूर्त) सुबह 11 बजकर 57 मिनट से दोपहर 12 बजकर 48 मिनट तक मान्य है। 
  • तीसरा (विजय मुहूर्त) दोपहर में 2 बजकर 31 मिनट से दोपहर 3 बजकर 23 मिनट तक रहने वाला है। 
 

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हरतालिका तीज - फोटो : Amar Ujala
हरतालिका तीज व्रत कथा
हरतालिका तीज हिंदू धर्म का प्रमुख व्रत है, जिसके प्रभाव से महिलाओं को पति की लंबी उम्र और उनका जन्मों-जन्मों के साथ का आशीर्वाद मिलता है। इस व्रत को देवी-पार्वती और उनकी तपस्या से जोड़ा जाता है। पौराणिक कथा की मानें तो देवी पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। कहते हैं कि माता पार्वती ने अपनी कठोर तपस्या बाल्यावस्था में हिमालय पर्वत पर गंगा तट की थी। इस दौरान वह केवल सूखे पत्तों का सेवन किया करती थी और इसी में अपनी तप में लीन रहती थीं।

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Hartalika Teej Katha - फोटो : Freepik
फिर एक समय की बात है जब देवर्षि नारद भगवान विष्णु के विवाह प्रस्ताव लेकर देवी पार्वती के पिता के पास पहुचे। यहां आकर देवऋषि नारद जी ने भगवान विष्णु के विवाह प्रस्ताव की बात की। इस दौरान यह बात देवी पार्वती  को पता चली और वह इसकी चर्चा अपनी सखी से की। इसके बाद सखी ने उन्हें वन में जाने की सलाह दी। इसके बाद देवी वन में आ गई और उन्होंने रेत से शिवलिंग बनाकर भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया को भगवान शिव की आराधना की।
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Hartalika Teej Katha - फोटो : adobe
माना जाता है कि देवी की भक्ति से प्रसन्न महादेव  प्रकट हुए और पार्वती जी को पत्नी रूप में स्वीकार कर लिया। तभी से ऐसी मान्यता है कि भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया पर हरतालिका तीज का व्रत रखने से अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है। साथ ही सभी इच्छाएं भी पूरी होती हैं।  

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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