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Guru Purnima 2025: इस साल कब मनाया जाएगा गुरु पूर्णिमा का पर्व? यहां जानें सही तिथि और महत्व

Tue, 17 Jun 2025 06:24 AM IST
ज्योति मेहरा ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

गुरु पूर्णिमा भारतीय संस्कृति में एक अत्यंत पावन पर्व माना गया है। यह दिन गुरु और शिष्य के रिश्ते की पवित्रता और उसके महत्व का प्रतीक माना जाता है।
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कब मनाया जाएगा गुरु पूर्णिमा का पर्व? - फोटो : adobe stock
Guru Purnima 2025: गुरु पूर्णिमा भारतीय संस्कृति में एक अत्यंत पावन पर्व माना गया है। यह दिन गुरु और शिष्य के रिश्ते की पवित्रता और उसके महत्व का प्रतीक माना जाता है। यह केवल पारंपरिक गुरु-शिष्य संबंध तक सीमित नहीं है, बल्कि आज के समय में माता-पिता, अध्यापक, आध्यात्मिक गुरु, और वे सभी लोग जो जीवन को दिशा देने में सहायक होते हैं, उन्हें भी इस दिन विशेष सम्मान दिया जाता है।

इस दिन को व्यास पूर्णिमा और वेद पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि मान्यता है कि इसी दिन महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था। महर्षि वेदव्यास ने महाभारत, श्रीमद्भागवत और 18 पुराणों की रचना की, जो आज भी सनातन धर्म के गूढ़ और गहन ज्ञान के स्त्रोत माने जाते हैं। वे महान ऋषि पराशर के पुत्र थे।

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गुरु पूर्णिमा से जुड़ी परंपराएं - फोटो : adobe stock
गुरु पूर्णिमा से जुड़ी परंपराएं और अनुष्ठान
  • गुरु पूजन- इस दिन लोग अपने गुरु के चरणों में पुष्प अर्पण कर उनका आशीर्वाद लेते हैं।
  • व्रत और ध्यान- कई लोग इस दिन उपवास रखते हैं और पूरे दिन ध्यान व भक्ति में लीन रहते हैं।
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गुरु पूर्णिमा से जुड़ी परंपराएं - फोटो : adobe stock
  • पवित्र नदियों में स्नान- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से पापों का नाश होता है।
  • दान-पुण्य- वस्त्र, अन्न, धन और जरूरतमंदों को दान देना इस दिन विशेष पुण्य प्रदान करता है।

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गुरु पूर्णिमा 2025 तिथि - फोटो : adobe stock
गुरु पूर्णिमा 2025 तिथि
हिंदू पंचांग के अनुसार गुरु पूर्णिमा का पर्व हर वर्ष आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। पंचांग के अनुसार पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 10 जुलाई को रात 1:36 बजे होगी और इसका समापन 11 जुलाई को रात 2:06 बजे होगा। उदया तिथि के अनुसार गुरु पूर्णिमा का पर्व 10 जुलाई को ही मनाया जाएगा।
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गुरु पूर्णिमा का महत्व - फोटो : adobe stock
गुरु पूर्णिमा का महत्व
गुरु केवल शिक्षा देने वाले व्यक्ति नहीं होते, बल्कि वे अज्ञान के अंधकार से बाहर निकालकर आत्मज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाने वाले मार्गदर्शक होते हैं। इस दिन का उद्देश्य अपने भीतर कृतज्ञता और श्रद्धा का भाव जागृत करना है। यही वह दिन है जब शिष्य अपने जीवन की सफलता और मार्गदर्शन के लिए गुरुओं का आभार व्यक्त करते हैं।

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): 
यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 
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