सिख धर्म के संस्थापक संत नानक देव का जन्मदिन हर साल कार्तिक पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस बार यह पर्व 4 नवंबर को है। इनके जन्म दिन को प्रकाश पर्व के रूप में मनाया जाता है। इसका कारण यह है कि इन्होंने समाज को आगे बढ़ने के लिए प्रकाश दिखाने का काम किया। गुरु नानक देव ने अपने जीवन काल में अरब देशों की यात्राएं की थी जहां पर उन्होंने कई संदेश दिए थे।
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गुरु नानक देव जी ने अपने जीवनकाल में कई जगह की यात्राएं कीं। एक बार नानक देव जी मक्का नगर में पहुंच गए। उनके साथ कुछ मुस्लिम भी थे। काबा जिसे दुनिया भर के मुसलमान खुदा का घर मानते हैं। हर मुसलमान यही दुआ करता है कि उसकी जिंदगी में काबा के दर्शन हो जाएं। जब वह मक्का पहुंचे तो सूरज अस्त हो रहा था। सभी यात्री काफी थक चुके थे। मक्का में मुस्लिमों का प्रसिद्ध पूज्य स्थान काबा है। गुरु जी रात के समय थकान होने पर काबा की तरफ पैर रखकर सो गए।
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एक व्यक्ति ने आकर नानक देव को जगाया और कहा कि इधर पैर करके न सोएं इस तरफ पवित्र काबा है। नानक देव उस व्यक्ति की बात सुनकर कुछ पल चुप रहे फिर सहज भाव से जवाब दिया। ऐसी दिशा या जगह बता दो जहां खुदा न हो नानक देव ने उस व्यक्ति को समझाया कि ईश्वर तो हर दिशा में और हर समय हमें देख रहा है। इसलिए जो भी करो ईमानदारी से करो क्योंकि ईश्वर तो हमें हर पल देख रहा होता है उससे कुछ भी छुप नहीं है।
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काबा में इन्होंने जो भी किया वह भी कुछ इसी तरह का प्रयास था। इन्होंने अपने जीवन में धर्म को व्यवहारिक बनाने के लिए कई तरह के कदम उठाए। इन्होने धर्म को कर्म से जोड़कर जीने का तरीका बताया।
धर्म की व्यवहारिकता को दर्शाने के लिए इन्होंने अपने जनेऊ संस्कार के अवसर पर जनेऊ धारण करने से मना कर दिया। इनका कहना था कि धर्म में सिर्फ आपकी भावना होनी चाहिए दिखावा नहीं। और काबा में भी इन्होंने यही बात इस एक घटना के माध्यम से लोगों को बताया।
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