फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Govardhan Puja 2022: गोवर्धन पूजा पर भगवान कृष्ण को क्यों लगाते हैं 56 भोग? जानिए इसका महत्व

Wed, 26 Oct 2022 08:30 AM IST
आशिकी पटेल धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 5
गोवर्धन पूजा पर भगवान कृष्ण को क्यों लगाते हैं 56 भोग? - फोटो : अमर उजाला
Importance of 56 Bhog in Govardhan Puja: आज देशभर में गोवर्धन पूजा का पर्व मनाया जा रहा है। इसे अन्नकूट के नाम से भी जाना जाता है। दीवाली के एक दिन बाद ही गोवर्धन पूजा की जाती है, लेकिन इस बार सूर्य ग्रहण की वजह से एक दिन बाद ये पर्व मनाया जा रहा है। ब्रज से शुरू हुई गोवर्धन पूजा पूरे देश में उत्सव की तरह मनाई जाती है। गोवर्धन के दिन भक्त भगवान श्री कृष्ण की पूजा करते हैं और उनसे ये प्रार्थना करते हैं कि वे उन्हें संकटों से उबारे। इस दिन भगवान कृष्ण को अन्नकूट का भोग भी लगाया जाता है। ऐसे में चलिए जानते हैं कि इस दिन भगवान कृष्ण को 56 भोग क्यों लगाए जाते हैं... 

Govardhan Puja-Bhai Dooj: गोवर्धन पूजा और भाई दूज आज, जानें दोनों त्योहारों के बारे में सभी जरूरी और खास बातें 
विज्ञापन

2 of 5
गोवर्धन पूजा पर भगवान कृष्ण को क्यों लगाते हैं 56 भोग? - फोटो : iStock
गोवर्धन पूजा की पौराणिक कथा
कहते हैं कि पहले सभी ब्रजवासी इंद्र की पूजा करते थे। भगवान श्री कृष्ण के कहने पर सभी ब्रजवासियों ने गोवर्धन की पूजा करनी प्रारंभ कर दी, जिसके कारण  भगवान इंद्र क्रोधित हो गए और ब्रज में अपने मेघों से घनघोर वर्षा प्रारंभ करा दी। चारों ओर तबाही मचने लगी। ये सब देखकर भगवान श्री कृष्ण ने सबकी रक्षा करने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठा लिया। सभी ब्रजवासियों ने अपने परिवार और पशुओं के साथ गोवर्धन पर्वत के नीचे शरण ली। सात दिनों तक घनघोर वर्षा होती रही। परंतु इससे भी ब्रजवासी विचलित नहीं हुए, तब इंद्र देव को ये आभास हुआ कि ये कोई साधारण बालक नहीं है। उन्होंने श्री कृष्ण से क्षमा याचना की। तभी पूरे देश में गोवर्धन पूजा की जाती है।
विज्ञापन

3 of 5
गोवर्धन पूजा पर भगवान कृष्ण को क्यों लगाते हैं 56 भोग? - फोटो : amar ujala
गोवर्धन पूजा की विधि
गोवर्धन पूजा के दिन सुबह जल्दी उठकर पूजन सामग्री के साथ में आप पूजा स्थल पर बैठ जाएं और अपने कुल देव का और कुलदेवी का ध्यान करें। पूजा के लिए गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत तैयार करें। गांव में पहले पूरे आंगन की गोबर से लिपाई की जाती है। गोबर से गोवर्धन तैयार करने के लिए गोवर्धन के प्रतीक एक ग्वाले की आकृति बनाई जाती है, जिसमें आखों के स्थान पर दो कौड़ियां लगाई जाती हैं। दांतों के प्रतीक के रूप में खीलें लगाई जाती हैं। गोवर्धन पर्वत पर लगे पेड़ों के प्रतीक के रूप में सफेद सीकें लगाकर उनके ऊपर रूई के गुच्छे लगाए जाते हैं।

4 of 5
गोवर्धन पूजा पर भगवान कृष्ण को क्यों लगाते हैं 56 भोग? - फोटो : amar ujala
गोवर्धन पर्वत की आकृति तैयार कर उनके मध्य में भगवान श्री कृष्ण की मूर्ति रखी जाती है। गोवर्धन जी की आकृति के मध्य यानी नाभि स्थान पर एक कटोरी जितना हिस्सा खाली छोड़ा जाता है और वहां एक कटोरी या मिट्टी का दीपक रखा जाता है। फिर इसमें दूध, दही, गंगाजल, शहद और बताशे इत्यादि डालकर पूजा की जाती है और बाद में इसे प्रसाद के रूप में बांटा जाता है। शाम को परिवार के सभी सदस्य गोवर्धन के प्रतीक की सात परिक्रमा करते हैं और गीत गाते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
गोवर्धन पूजा पर भगवान कृष्ण को क्यों लगाते हैं 56 भोग? - फोटो : amar ujala
56 भोग का महत्व
भगवान श्री कृष्ण ने ब्रजवासियों को इंद्र के प्रकोप से बचाया था इसलिए सभी ने खुश होकर श्री कृष्ण के लिए 56 प्रकार के भोग तैयार किए थे। तभी से गोवर्धन पूजा के दिन भगवान को 56 भोग लगाए जाते हैं। ऐसी मान्यता है कि जो लोग इस दिन श्री कृष्ण को 56 भोग लगाते हैं, उनके जीवन में कभी किसी चीज की कमी नहीं होती है। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें