गोवर्धन पूजा पर भगवान कृष्ण को क्यों लगाते हैं 56 भोग?
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गोवर्धन पर्वत की आकृति तैयार कर उनके मध्य में भगवान श्री कृष्ण की मूर्ति रखी जाती है। गोवर्धन जी की आकृति के मध्य यानी नाभि स्थान पर एक कटोरी जितना हिस्सा खाली छोड़ा जाता है और वहां एक कटोरी या मिट्टी का दीपक रखा जाता है। फिर इसमें दूध, दही, गंगाजल, शहद और बताशे इत्यादि डालकर पूजा की जाती है और बाद में इसे प्रसाद के रूप में बांटा जाता है। शाम को परिवार के सभी सदस्य गोवर्धन के प्रतीक की सात परिक्रमा करते हैं और गीत गाते हैं।