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देवउठनी एकादशी 2019: व्रत के दौरान इन उपायों से मिलेगा फल

Thu, 07 Nov 2019 06:50 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
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देवउठनी एकादशी
दिवाली के सात दिन बाद देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु विश्राम से जागते हैं और सृष्टि का कार्य-भार देखते हैं। सभी मंगल कार्य इस एकादशी से शुरू होते है। इस एकादशी में ही तुलसी विवाह भी किया जाता है। इस साल 8 नवंबर को देवउठनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा। कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवउठनी एकादशी कहा जाता है। आइए जानते है कि इस दिन क्या करना शुभ रहेगा और क्या अशुभ

 
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देवउठनी एकादशी के व्रत में क्या करें,
देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु को जगाते समय दीपक अवश्य जलाना चाहिए। 
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देवउठनी एकादशी के दिन आपको सूर्योदय से पहले उठना चाहिए।

 

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देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु के नाम का कीर्तन भी करना चाहिए और विष्णु भगवान को घंटा बजाकर उठाना चाहिए।  
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देवउठनी एकादशी के दिन निर्जल व्रत रखना चाहिए। 



 
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देवउठनी एकादशी के दिन किसी गरीब को और गाय को भोजन अवश्य कराएं। 
 
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देवउठनी एकादशी के व्रत में क्या ना करें,
देवउठनी एकादशी के दिन भूलकर भी चावल का सेवन ना करें मान्यता है कि वरना अगला जन्म रेंगने वाली प्रजाति में मिलता है।

 

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देवउठनी एकादशी में व्यक्ति को लड़ाई-झगड़े से दूर रहना चाहिए और इस दिन किसी जीव को भी ना मारें वरना आपको पाप का भागीदार बनना पड़ता है।

 

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देवउठनी एकादशी के दिन भूल से भी तुलसी माता का अपमान नही करना चाहिए। 

 

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देवउठनी एकादशी का व्रत रखने वाले व्यक्ति को बिस्तर पर नहीं सोना चाहिए। 

 

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- फोटो : PTI
देवउठनी एकादशी के दिन मास-मदिरा का प्रयोग वर्जित है। 


 
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तुलसी पूजन की विधि,
तुलसी के चारों तरफ स्तंभ बनाकर उस पर तोरण सजाएं और रंगोली से अष्टदल कमल बनाएं। शंख,चक्र और गाय के पैर बनाएं। साथ ही तुलसी के साथ आंवले का गमला भी लगाएं। दशाक्षरी मंत्र से तुलसी का आवाहन करें और घी का दीपक जलाएं। कम से कम 20 बार तुलसी जी की परिक्रमा करें। तुलसी के चारों ओर दीपदान करें। देवउठनी एकादशी के दिन श्रीहरि को तुलसी चढ़ाना दस हज़ार गोदान के बराबर है। जिन दंपत्तियों के संतान नही है उनको तुलसी पाठ जरुर करना चाहिए।
ॐ श्री तुलस्यै विद्महे। 
विष्णु प्रियायै धीमहि। 
तन्नो वृन्दा प्रचोदयात्।। 

तुलसी पूजन के समय इस मंत्र का जाप करें।
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