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Chhath 2025: छठी मैया कौन हैं और क्यों होती है उनकी पूजा?

Sun, 26 Oct 2025 06:16 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Why Chhathi Maiya is worshipped: छठ पूजा सूर्यदेव और छठी मैया की उपासना का पावन पर्व है, जिसमें व्रती कठोर नियमों का पालन करते हुए परिवार की सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना करते हैं। यह त्योहार श्रद्धा, तप और भक्ति का प्रतीक माना जाता है।
 
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महापर्व छठ के शुभकामना संदेश - फोटो : Amar Ujala
Who is Chhathi Maiya: छठ पूजा हिंदू धर्म का एक अत्यंत पावन और आस्था से जुड़ा त्योहार है, जिसमें सूर्यदेव और छठी मैया की आराधना की जाती है। यह पर्व सूर्य षष्ठी व्रत के नाम से भी जाना जाता है। इस पर्व की शुरुआत नहाय-खाय से होती है और चार दिनों तक चलने वाले इस व्रत में व्रती कठोर नियमों का पालन करते हैं। छठ पूजा में डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि, दीर्घायु और कल्याण की कामना की जाती है। माना जाता है कि सूर्यदेव जीवन, ऊर्जा और स्वास्थ्य के प्रतीक हैं, वहीं छठी मैया संतान और परिवार की रक्षा करती हैं। इसलिए यह पर्व श्रद्धा, तप और भक्ति का अद्भुत संगम माना जाता है।

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प्राचीन ग्रंथों जैसे मार्कण्डेय पुराण में छठी देवी को प्रकृति का छठा रूप बताया गया है। - फोटो : अमर उजाला प्रिंट
छठ पूजा का महत्व 
छठ पूजा का महत्व अत्यंत आध्यात्मिक और धार्मिक माना जाता है। यह पर्व दिवाली के छह दिन बाद, कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। मान्यता है कि छठी मैया, सूर्यदेव की बहन हैं, जो संतान की रक्षा और परिवार के कल्याण का आशीर्वाद देती हैं। प्राचीन ग्रंथों जैसे मार्कण्डेय पुराण में छठी देवी को प्रकृति का छठा रूप बताया गया है, जो सृष्टि के संतुलन और जीवन की ऊर्जा से जुड़ी हैं। छठ पर्व से जुड़ी अनेक पौराणिक कथाएँ हैं, जिनमें राजा प्रियंवद और द्रौपदी की कथा विशेष रूप से प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि इन कथाओं से प्रेरित होकर लोगों ने सूर्यदेव और छठी मैया की उपासना आरंभ की, ताकि उनके जीवन में सुख, स्वास्थ्य और समृद्धि बनी रहे। आज भी करोड़ों श्रद्धालु श्रद्धा और भक्ति के साथ यह व्रत रखते हैं, जो आस्था, तप और शुद्धता का प्रतीक माना जाता है।
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छठी मैया को संतान की रक्षा करने वाली और उनके जीवन में सुख-समृद्धि लाने वाली देवी माना जाता है। - फोटो : Amar Ujala
छठी मैया कौन हैं
मार्कण्डेय पुराण के अनुसार, जब सृष्टि की रचना हुई तो देवी प्रकृति ने स्वयं को छह भागों में विभाजित किया। इन छह रूपों में छठा अंश सबसे शक्तिशाली और महत्वपूर्ण माना गया, जिसे छठी देवी या छठी मैया कहा गया। इन्हें ब्रह्मा जी की मानस पुत्री और मातृत्व की प्रतीक देवी के रूप में पूजा जाता है। छठी मैया को संतान की रक्षा करने वाली और उनके जीवन में सुख-समृद्धि लाने वाली देवी माना जाता है।

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क्यों की जाती है सूर्यदेव और छठी मैया की पूजा - फोटो : अमर उजाला।
क्यों की जाती है सूर्यदेव और छठी मैया की पूजा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, छठी मैया सूर्यदेव की बहन हैं। इसीलिए छठ पूजा में सूर्यदेव और छठी मैया दोनों की संयुक्त उपासना की जाती है। ऐसा विश्वास है कि छठी मैया नवजात शिशु की छह महीनों तक रक्षा करती हैं और उसे हर बुरी शक्ति से बचाती हैं। इस कारण यह व्रत मातृत्व, सुरक्षा और पारिवारिक सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
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यह व्रत संतान प्राप्ति और उसकी रक्षा के लिए किया जाने लगा। - फोटो : अमर उजाला।
राजा प्रियंवद की कथा
प्राचीन कथा के अनुसार, राजा प्रियंवद और उनकी रानी मालिनी संतान सुख से वंचित थे। महर्षि कश्यप ने उनके लिए पुत्रेष्टि यज्ञ करवाया, जिससे रानी को संतान तो प्राप्त हुई, लेकिन वह मृत जन्मी। दुखी राजा आत्महत्या करने जा रहे थे, तभी देवी षष्ठी प्रकट हुईं और उन्हें व्रत करने का संदेश दिया। राजा ने पूरे श्रद्धा भाव से व्रत रखा, जिससे उन्हें जीवित संतान का वरदान मिला। तभी से यह व्रत संतान प्राप्ति और उसकी रक्षा के लिए किया जाने लगा।
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छठ पूजा से जुड़ी एक और प्रसिद्ध कथा महाभारत काल की है। - फोटो : अमर उजाला
द्रौपदी और पांडवों की कथा
छठ पूजा से जुड़ी एक और प्रसिद्ध कथा महाभारत काल की है। जब पांडव अपना राज्य हारकर संकट में पड़ गए, तब भगवान श्रीकृष्ण ने द्रौपदी को छठ व्रत करने की सलाह दी। द्रौपदी ने पूरी श्रद्धा और भक्ति से यह व्रत किया, जिसके परिणामस्वरूप उनकी मनोकामना पूरी हुई और पांडवों को अपना राज्य वापस मिल गया। तभी से यह व्रत मनोकामना पूर्ण करने वाला और जीवन में सफलता लाने वाला पर्व माना जाता है।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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