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चतुर्मास शुरू, जान लें इन चार माह के नियम, इस दौरान क्या करें

Thu, 02 Jul 2020 08:29 AM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला
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चातुर्मास 2020 - चातुर्मास के नियम - फोटो : Social Media
चातुर्मास जुलाई की पहली तारीख से प्रारंभ हो चुका है। चातुर्मास की अवधि 25 नवंबर 2020 तक रहेगी। हिन्दू धर्म में चातुर्मास का विशेष महत्व होता है। चातुर्मास से आशय चार माह (श्रावण, भाद्रपद, अश्विन, कार्तिक) से है। चातुर्मास आषाढ़ माह की शुक्ल पक्ष एकादशी से प्रारंभ होकर, कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी को समाप्त होता है। चातुर्मास में मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है। इस दौरान जातकों को विशेष सावधानी भी बरतने की आवश्यकता होती है। आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से।
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भगवान विष्णु (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Social media
धार्मिक दृष्टिकोण से चातुर्मास
धार्मिक दृष्टिकोण से चातुर्मास का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता के अनुसार ऐसा कहा जाता है कि चातुर्मास में भगवान विष्णु पाताल लोक में चार महीने के लिए विश्राम करते हैं। ऐसे में सृष्टि के संचालन का कार्यभार भगवान शिव संभालते हैं। चतुर्मास में ही भगवान शिव का सबसे प्रिय महीना सावन आता है। जगत के पालनहार विष्णु जी की अनुपस्थिति के कारण चातुर्मास में विवाह या अन्य संस्कार, गृह प्रवेश जैसे अन्य मांगलिक कार्य रुक जाते हैं। वहीं जब कार्तिक शुक्ल की एकादशी जिसे देवोत्थान एकादशी कहते हैं आती है तब भगवान विष्णु जागते हैं और फिर पुनः शुभ कार्यों की शुरुआत हो जाती है।
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एक स्थान पर साधना के लिए श्रेष्ठ है चतुर्मास
एक स्थान पर साधना के लिए श्रेष्ठ है चातुर्मास
चातुर्मास का समय साधना के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। हालांकि साधना के संचरण नहीं किया जाना चाहिए। बल्कि एक स्थान पर ही बैठकर साधना करनी चाहिए। इन चार महीनों में सावन का महीना सबसे महत्वपूर्ण माना गया है। इस माह में जो व्यक्ति भागवत कथा, भगवान शिव का पूजन, धार्मिक अनुष्ठान, दान करेगा उसे अक्षय पुण्य प्राप्त होगा।

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खान-पान रखें संयम - फोटो : Pixabay
चातुर्मास में सेहत ठीक रखने के लिए खान-पान रखें संयम
चातुर्मास जिसमें सावन, भादौ, आश्विन और कार्तिक का माह आता है उसमें खान-पान और व्रत के नियम और संयम का पालन करना चाहिए। दरअसल इन 4 महीनो में व्यक्ति की पाचनशक्ति कमजोर हो जाती है। इससे अलावा भोजन और जल में बैक्टीरिया की तादाद भी बढ़ जाती है। इस समय पानी को ऊबालकर पीना ज्यादा लाभकारी होता है। 
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भाद्रपद में दही के सेवन से करें परहेज - फोटो : सोशल मीडिया
खानपान में इन चीजों का करें परहेज
चातुर्मास मास का पहला माह सावन आता है। नियमानुसार इस महीने हरी पत्तेदार सब्जियों को नहीं खाना चाहिए। दूसरा माह भाद्रपद आता है। इस माह दही खाने से बचना चाहिए। चातुर्मास का तीसरा माह अश्विन होता है जिसमें दूध से परहेज बाताया गया है। चातुर्मास का अंतिम माह कार्तिक में दालों का सेवन नहीं करना चाहिए। चातुर्मास में खानपान से जुड़े ये नियम अच्छी सेहत के लिए उत्तम होते हैं।
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