फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Bhai Dooj 2024: भाई दूज पर तिलक के लिए मिलेगा सिर्फ इतना समय, जानिए शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र, आरती

Sun, 03 Nov 2024 08:36 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Bhai Dooj 2024 Shubh Muhurat: आज यानी  3 नवंबर 2024 को भाई दूज का  है। भाई दूज का पर्व भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को मजबूत करता है। इसे हर साल कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है।
विज्ञापन
1 of 7
स साल भाई दूज पर सुबह 11 बजकर 39 मिनट तक सौभाग्य योग रहेगा। - फोटो : Amar Ujala
Bhai Dooj 2024 Shubh Muhurat: आज भाई दूज का त्योहार है। भाई दूज का पर्व भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को मजबूत करता है। इसे हर साल कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। इस दिन बहनें भाई को रोली और अक्षत का टीका करते हुए उसे गोला देती हैं, और भाई की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करती हैं। हर साल की तरह इस बार भी भाई दूज पर कई शुभ योग बन रहे हैं।

ज्योतिष गणना के अनुसार इस साल भाई दूज पर सुबह 11 बजकर 39 मिनट तक सौभाग्य योग रहेगा। फिर शोभन योग शुरू हो जाएगा। वहीं इस दौरान अनुराधा नक्षत्र और बालव व कौलव करण का संयोग भी बन रहता है। इस संयोग में भाई को तिलक लगाने से रिश्तों में मिठास और विश्वास बना रहता है। परंतु इस दौरान कुछ खास कार्यों को करने की मनाही होती हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि भाई दूज के दिन का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र और आरती। 

विज्ञापन

2 of 7
उदयातिथि के अनुसार 3 नवंबर को भाई दूज का पर्व मनाया जाएगा। - फोटो : Amar Ujala
कब है भाई दूज 2024?
कार्तिक मास द्वितीया तिथि का आरंभ 2 नवंबर को रात 8:22 बजे हो जाएगा और कार्तिक द्वितीया तिथि 3 नवंबर को रात में 10:06 बजे तक रहेगी। ऐसे में उदयातिथि के अनुसार 3 नवंबर को भाई दूज का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन सुबह में 11 बजकर 39 मिनट तक सौभाग्य योग रहेगा। इसके बाद शोभन योग शुरू हो जाएगा। इसलिए भाई दूज के दिन पूजा के लिए सबसे उत्तम मुहूर्त 11:45 मिनट तक रहेगा।
विज्ञापन

3 of 7
कार्तिक मास द्वितीया तिथि का आरंभ 2 नवंबर 2024 को रात 8 बजकर 22 मिनट से होगा। - फोटो : अमर उजाला
भाई दूज 2024 तिथि 
कार्तिक मास द्वितीया तिथि का आरंभ 2 नवंबर 2024 को रात 8 बजकर 22 मिनट से होगा। इस तिथि का समापन 3 नवंबर को रात में 10 बजकर 6 मिनट पर है।

भाई दूज तिलक मुहूर्त
इस साल भाई दूज पर तिलक लगाने का शुभ मुहूर्त 3 नवंबर को दोपहर 1 बजकर 10 मिनट से दोपहर 3 बजकर 22 मिनट तक रहेगा। मुहूर्त की कुल अवधि 2 घंटे 12 मिनट की है।

4 of 7
तिलक की थाली में आप भाई को तिलक के बाद पहनाने वाली फूल माला भी जरूर रखें। - फोटो : Amar Ujala
थाली में जरूर रखें ये चीजें
भाई दूज के लिए थाली तैयार करते समय सबसे पहले उसमें तिलक करने के लिए रोली ,चंदन,अक्षत यानी चावल भी थाली में जरूर रखें। लाल कलावा, सुपारी, भगवान गणेश का प्रतीक है, एक चांदी का सिक्का रखें। तिलक की थाली में आप भाई को तिलक के बाद पहनाने वाली फूल माला भी जरूर रखें। साथ ही मिठाई भी थाली में रखें। इस थाली में केला जरूर रखें। इसे खिलाने से बृहस्पति ग्रह मजबूत होता है।
विज्ञापन

5 of 7
भाई दूज पर करें मंत्र का  जाप - फोटो : freepik
भाई दूज पर करें मंत्र का  जाप
भाई दूज पर भाई को तिलक करते समय विशेष मंत्र का जाप करना चाहिए। चौक पर बैठाने के बाद भाई के हाथों पर चावल का घोर लगाकर फूल, पान, सुपारी रखें। इसके उपरांत जल छोड़ते हुए मंत्र का जाप करें… ‘गंगा पूजा यमुना को, यमी पूजे यमराज को। सुभद्रा पूजे कृष्ण को गंगा यमुना नीर बहे मेरे भाई आप बढ़े फूले फलें। ’
विज्ञापन

6 of 7
भाई दूज आरती - फोटो : Adobe stock
भाई दूज आरती

ॐ जय यमुना माता, हरि ॐ जय यमुना माता,
जो नहावे फल पावे सुख सुख की दाता

ॐ पावन श्रीयमुना जल शीतल अगम बहै धारा,
जो जन शरण से कर दिया निस्तारा

ॐ जो जन प्रातः ही उठकर नित्य स्नान करे,
यम के त्रास न पावे जो नित्य ध्यान करे

ॐ कलिकाल में महिमा तुम्हारी अटल रही,
तुम्हारा बड़ा महातम चारों वेद कही

ॐ आन तुम्हारे माता प्रभु अवतार लियो,
नित्य निर्मल जल पीकर कंस को मार दियो

ॐ नमो मात भय हरणी शुभ मंगल करणी,
मन ‘बेचैन’ भय है तुम बिन वैतरणी
ॐ ॐ जय यमुना माता, हरि ॐ जय यमुना माता।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

7 of 7
भाई दूज तिलक विधि - फोटो : Adobe stock
भाई दूज तिलक विधि
  • भाई दूज के दिन सुबह ही स्नान कर लें और साफ वस्त्रों को धारण करें। 
  • फिर एक थाली को तैयार कर लें। 
  • थाली में रोली, अक्षत और गोला रखें।
  • इसके बाद भगवान गणेश का नाम लेते हुए पूजा करें। 
  • अब भाई का तिलक करें और नारियल का गोला भाई को दें। 
  • फिर भाई को मिठाई खिलाएं और आरती करें। 
  • भाई को भोजन करवाएं। 
  • उसके बाद भाई अपनी बहन से आशीर्वाद लें और उन्हें भेंट स्वरूप कुछ उपहार दें।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें