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अजा एकादशी व्रत आज, जानें पूजा विधि और पारण का शुभ समय

Mon, 07 Sep 2026 12:41 AM IST
ज्योति मेहरा धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

हिंदू कैलेंडर में एक साल के दौरान 24 एकादशी पड़ती हैं और प्रत्येक का अपना अलग महत्व बताया गया है। सितंबर 2026 की पहली एकादशी अजा एकादशी होगी। आइए जानते हैं अजा एकादशी का व्रत कब रखा जाएगा, पारण का सही समय क्या है और पूजा कैसे करनी चाहिए।
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Aja Ekadashi 2026 Date - फोटो : अमर उजाला AI
आज 7 सितंबर 2026 है और हिंदू पंचांग के अनुसार सितंबर महीने की पहली एकादशी के रूप में अजा एकादशी का व्रत रखा जाएगा। भगवान विष्णु को समर्पित इस पावन तिथि पर व्रत, पूजा और भक्ति का विशेष महत्व माना जाता है। हालांकि, अजा एकादशी की तारीख को लेकर इस बार लोगों में असमंजस बना हुआ है। ऐसे में आइए जानते हैं अजा एकादशी का व्रत किस दिन रखा जाएगा, पारण का शुभ समय क्या रहेगा और भगवान विष्णु की पूजा किस विधि से करनी चाहिए।
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कब रखा जाएगा अजा एकादशी व्रत? - फोटो : adobe stock
कब रखा जाएगा अजा एकादशी व्रत?
पंचांग के मुताबिक, भाद्रपद कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 6 सितंबर 2026 को शाम 7:30 बजे आरंभ होगी और अगले दिन 7 सितंबर को शाम 5:05 बजे समाप्त होगी। व्रत के लिए उदया तिथि को मान्यता दी जाती है। इसलिए अजा एकादशी का व्रत 7 सितंबर 2026, सोमवार को रखा जाएगा।
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अजा एकादशी व्रत का पारण कब होगा? - फोटो : adobe stock
अजा एकादशी व्रत का पारण कब होगा?
अजा एकादशी व्रत का पारण 8 सितंबर 2026 को किया जाएगा। पंचांग के अनुसार, इस दिन सुबह 6:02 बजे से 8:33 बजे तक पारण का शुभ समय रहेगा। व्रती इस अवधि में स्नान, पूजा और भगवान विष्णु की आराधना करने के बाद व्रत खोल सकते हैं।

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अजा एकादशी पर बनेंगे शुभ योग - फोटो : freepik
अजा एकादशी पर बनेंगे शुभ योग
इस बार अजा एकादशी को धार्मिक दृष्टि से विशेष माना जा रहा है। 7 सितंबर की सुबह पुनर्वसु और पुष्य नक्षत्र का संयोग रहेगा। इसके अलावा इस दिन वरीयान योग और सर्वार्थ सिद्धि योग भी बनने की बात कही गई है।
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अजा एकादशी की पूजा विधि - फोटो : adobe
अजा एकादशी की पूजा विधि
  • सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • पूजा स्थल की सफाई कर गंगाजल से शुद्धिकरण करें और व्रत का संकल्प लें।
  • पीले या लाल कपड़े पर भगवान विष्णु की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें।
  • भगवान को पीला चंदन, अक्षत, फूल, माला और वस्त्र अर्पित करें। पूजा में तुलसी दल अवश्य शामिल करें।
  • खीर, मिठाई और मौसमी फलों का भोग लगाएं।
  • घी का दीपक और धूप जलाकर भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें।
  • इसके बाद विष्णु चालीसा और अजा एकादशी व्रत कथा का पाठ करें।
  • अंत में भगवान विष्णु और एकादशी माता की आरती करें।
  • अगले दिन द्वादशी तिथि में पूजा करने के बाद निर्धारित समय में व्रत का पारण करें।
 

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

 
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