फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अजा एकादशी पर भूलकर भी न करें ये 5 काम, पड़ सकता है अशुभ प्रभाव

Mon, 07 Sep 2026 12:28 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

अजा एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। इस दिन कुछ कामों को वर्जित माना गया है, इसलिए व्रत रखने वालों को इन नियमों का खास ध्यान रखना चाहिए।
विज्ञापन
1 of 7
अजा एकादशी - फोटो : amar ujala

हिंदू धर्म में एकादशी तिथि को भगवान विष्णु की आराधना के लिए बेहद खास माना जाता है। हर महीने कृष्ण और शुक्ल पक्ष में एकादशी आती है। भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को अजा एकादशी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन व्रत रखने और भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। अजा एकादशी के दिन पूजा-पाठ, मंत्र जाप और दान का विशेष महत्व बताया गया है। साथ ही इस दिन कुछ कार्यों को करने से बचने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि व्रत के दौरान गलत आचरण करने से पूजा का फल प्रभावित हो सकता है। ऐसे में अगर आप भी अजा एकादशी का व्रत रखने जा रहे हैं, तो इन नियमों का ध्यान जरूर रखें।

विज्ञापन

2 of 7
अजा एकादशी पर चावल क्यों नहीं खाना चाहिए? - फोटो : Adobe stock

अजा एकादशी पर चावल क्यों नहीं खाना चाहिए?
एकादशी व्रत में चावल का सेवन वर्जित माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, एकादशी के दिन चावल खाने से व्यक्ति को नकारात्मक फल प्राप्त हो सकता है। यही वजह है कि इस दिन व्रत रखने वाले लोग चावल और उससे बने खाद्य पदार्थों से दूरी बनाते हैं। व्रत के दौरान अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार फल, दूध या अन्य सात्विक चीजों का सेवन किया जा सकता है। जो लोग निर्जला या अन्य कठिन व्रत रखते हैं, उन्हें अपनी शारीरिक स्थिति का भी ध्यान रखना चाहिए।

विज्ञापन

3 of 7
तुलसी के पत्ते न तोड़ें - फोटो : Adobe Stock

तुलसी के पत्ते न तोड़ें
भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी का विशेष महत्व है। अजा एकादशी के दिन तुलसी से जुड़े कुछ नियमों का पालन करने की धार्मिक परंपरा है। मान्यता है कि एकादशी के दिन तुलसी माता व्रत रखती हैं, इसलिए इस दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए। अगर पूजा के लिए तुलसी की आवश्यकता हो तो पत्ते एक दिन पहले तोड़कर रखे जा सकते हैं। कई परंपराओं में इस दिन तुलसी के पौधे को जल देने से भी परहेज करने की बात कही गई है।

4 of 7
तामसिक भोजन से रहें दूर - फोटो : Freepik

तामसिक भोजन से रहें दूर
एकादशी को सात्विकता और संयम का दिन माना जाता है। इसलिए इस दिन मांसाहार, मदिरा, प्याज, लहसुन और अन्य तामसिक पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए। व्रत रखने वाले व्यक्ति को हल्का और सात्विक भोजन करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, सात्विक आहार मन को शांत रखने और पूजा-पाठ में एकाग्रता बनाए रखने में मदद करता है।

विज्ञापन

5 of 7
क्रोध, चुगली और निंदा से बचें - फोटो : adobe stock

क्रोध, चुगली और निंदा से बचें
अजा एकादशी के दिन सिर्फ खान-पान ही नहीं, बल्कि व्यवहार पर भी संयम रखने की सलाह दी जाती है। किसी से झगड़ा करना, क्रोध करना, झूठ बोलना, चुगली करना या दूसरों की निंदा करना व्रत के दौरान अनुचित माना जाता है। इस दिन व्यक्ति को अपने मन को शांत रखने, भगवान विष्णु का नाम जपने और धार्मिक कार्यों में समय बिताने का प्रयास करना चाहिए। मान्यता है कि व्रत का उद्देश्य केवल भोजन का त्याग करना नहीं, बल्कि मन और विचारों को भी सकारात्मक रखना है।

विज्ञापन

6 of 7
गलत संगति से बचें - फोटो : amar ujala

देर रात तक जागने और गलत संगति से बचें
एकादशी के दिन व्यक्ति को अपनी दिनचर्या संयमित रखने की कोशिश करनी चाहिए। देर रात तक अनावश्यक गतिविधियों में समय बिताने, नकारात्मक विचारों या गलत संगति से बचना बेहतर माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु का ध्यान, धार्मिक ग्रंथों का पाठ और भजन-कीर्तन करना शुभ माना जाता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

7 of 7
अजा एकादशी का व्रत 7 सितंबर 2026, सोमवार को रखा जाएगा। - फोटो : अमर उजाला AI

कब है अजा एकादशी 2026?
वैदिक पंचांग के अनुसार, भाद्रपद कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 6 सितंबर 2026 को शाम 7:30 बजे आरंभ होगी और अगले दिन 7 सितंबर को शाम 5:05 बजे समाप्त होगी। व्रत के लिए उदया तिथि को मान्यता दी जाती है। इसलिए अजा एकादशी का व्रत 7 सितंबर 2026, सोमवार को रखा जाएगा।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें