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Aja Ekadashi 2025: अगस्त में कब है अजा एकादशी? जानें तिथि, पारण का समय और लाभ

Thu, 07 Aug 2025 06:13 PM IST
ज्योति मेहरा ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को अजा एकादशी कहा जाता है। इस व्रत को करने से जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं और अनेक कठिनाइयों पर विजय प्राप्त होती है। ऐसे में आइए जानते हैं कि इस साल अजा एकादशी किस दिन पड़ रही है। 
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अजा एकादशी 2025 - फोटो : adobe stock
Aja Ekadashi 2025: हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को अजा एकादशी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि यह व्रत व्यक्ति के जीवन से दुख, दोष और संकटों को दूर करके सुख-शांति और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है। शास्त्रों के अनुसार अजा एकादशी का पालन करने से व्यक्ति को पूर्व जन्मों के पापों से भी मुक्ति मिलती है। इस व्रत को करने से जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं और अनेक कठिनाइयों पर विजय प्राप्त होती है। ऐसे में आइए जानते हैं कि इस साल अजा एकादशी किस दिन पड़ रही है। 

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अजा एकादशी 2025 तिथि और मुहूर्त - फोटो : adobe stock
अजा एकादशी 2025 तिथि और मुहूर्त
एकादशी तिथि आरंभ- 18 अगस्त 2025, शाम 5:22 बजे
एकादशी तिथि समाप्त- 19 अगस्त 2025, दोपहर 3:32 बजे
व्रत पारण का समय (20 अगस्त को): सुबह 5:53 बजे से 8:29 बजे तक
धार्मिक मान्यता है कि अजा एकादशी पर उपवास और भगवान विष्णु की भक्ति करने से जीवन के समस्त पाप नष्ट होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
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अजा एकादशी व्रत का महत्व - फोटो : adobe
अजा एकादशी व्रत का महत्व
मान्यता है कि जो भी श्रद्धालु भगवान विष्णु के ऋषिकेश स्वरूप की उपासना करता है और व्रत कथा का श्रवण करता है, उसे मृत्यु के बाद विष्णु लोक की प्राप्ति होती है। इस व्रत की कथा सुनने मात्र से ही अश्वमेध यज्ञ के बराबर पुण्य फल मिलता है।

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व्रत एवं पूजन विधि - फोटो : adobe
व्रत एवं पूजन विधि
  • व्रत वाले दिन प्रातःकाल स्नान आदि करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।
  • पूजा स्थल पर भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
  • दीप, धूप, पुष्प, फल आदि से विधिवत पूजा करें।
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व्रत एवं पूजन विधि - फोटो : adobe stock
  • विष्णु सहस्रनाम और श्रीकृष्ण भजन का पाठ अवश्य करें।
  • रात्रि में जागरण करें और अगले दिन नियत समय पर व्रत का पारण करें।
 


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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