शिमला के चार साल युग के अपहरण और हत्या मामले के दो आरोपियों को जिला सत्र न्यायालय परिसर में जुटी भीड़ ने सुबह करीब दस बजे जमकर पिटाई की। सीआईडी और पुलिस की सुरक्षा के बावजूद उग्र भीड़ ने सुबह दस करीब ग्यारह बजे मुख्य गेट से बाहर निकलते ही लात घूंसों से जमकर धुनाई की।
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युग हत्याकांड
समय सुबह 9.30 बजे ... जगह जिला कचहरी चक्कर ... परिसर के बाहर लोगों की भीड़ जुटी हुई थी उनकी आंखें ब्रेसब्री से युग के कत्ल के आरोपियों को तलाश रही थी। कोर्ट परिसर में आने वाली प्रत्येक गाड़ी की आहट से ही भीड़ चौंक जाती और उसमें से उतरने वाले व्यक्तियों को ध्यान से देखती। ठीक 9.45 बजे पुलिस और सीआईडी की टीम आरोपियों को लेकर ट्रैंपों ट्रेवलर में पहुंची। आरोपियों को सुरक्षा कर्मियों ने उतारा और सीधे अदालत में सभी आरोपियों को ले गए। आरोपियों के पीछे पीछे भीड़ भी भीतर पहुंच गई।
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युग हत्याकांड
अदालत ने आरोपियों को दोपहर बारह बजे के बाद पेश करने को कहा। इस पर तीनों आरोपियों को तब तक सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस स्टेशन बालूगंज ले जाने का फैसला लिया गया लेकिन जैसे ही टीम अदालत के बाहर पहुंची। इनके बाहर आते ही भीड़ तेजेंद्र सिंह और चंद्र शर्मा पर टूट पड़ी। इन्हें भीड़ से बचाने के लिए सुरक्षा कर्मियों को बेहद मशक्कत करनी पड़ी।
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युग हत्याकांड
किसी ने लात-घूंसे तो किसी ने तमाचे जड़ दिए।
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युग हत्याकांड
पुलिस ने बीच बचाव कर किसी तरह आरोपियों को वहां से निकाला।
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करीब बीस मिनट तक चले इस हंगामे के बाद पुलिस ने आरोपियों को बालूगंज थाने सेफ कस्टडी में पहुंचाया। इस दौरान भीड़ को सूचना थी कि आरोपियों को बारह बजे लाया जाएगा। आरोपियों को पेश करने के समय की सूचना मिलने पर न्यायालय परिसर में भीड़ और बढ़ना शुरू हो गई। बारह बजे तक जब आरोपी परिसर नहीं लाए गए तो, फिर तीन बजे पेश करने की उसके बाद चार बजे पेश करने की चर्चा चली।
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युग हत्याकांड
इस बीच करीब 4:30 बजे पुलिस जीप में एक अन्य मामले के आरोपी को परिसर लाया, चंद एकदम से सैकड़ों लोगों की भीड़ गाड़ी के पीछे दौड़ी। अन्य आरोपी को देख कर लोग शांत हो गए। फिर चर्चा चली कि आरोपियों को थाने में ही जज के सामने पेश किया जा रहा है। साढ़े चार से लेकर देर शाम करीब 5 बजे तक पेश कर दिए जाने और पांच बजे के बाद पेश करने को लेकर असमंजस बना रहा। भीड़ फिर भी परिसर में ही डटी रही।
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युग हत्याकांड
चक्कर न्यायालय में फैली अफवाह कि यूनिवर्सिटी के छात्रों ने थाने को घेर लिया है, इस पर थाने में रखे गए आरोपियों की सूचना मिलने पर उग्र भीड़ और युग के परिजन व कारोबारी 5:15 पर थाने के बाहर पहुंच गए। यहां पहले से भारी संख्या में लोग जमा थे जिनमें महिलाएं भी शामिल थी।
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दो साल 2 महीने और 8 दिन बाद इस केस से परतें खुल सकीं। जब आरोपी विक्रांत ने इस केस के बारे में सब कुछ सीआईडी को बता दिया।
- फोटो : अमर उजाला
यहां परिजनों ने आरोपियों को उनके हवाले करने की मांग को लेकर प्रदर्शन और नारेबाजी की और कुछ देर के लिए बालूगंज चौड़ा मैदान सड़क को रोक दिया। इस बीच 5:29 पर थाना प्रभारी बाहर आए और उन्होंने लोगों को शांत करने के लिए प्रयास किया उन्होंने बताया कि आरोपियों को कोर्ट पेश करने को पहुंचा दिए है। इस पर सारी भीड़ चक्कर की ओर निकल पड़ी।
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तेजेंद्र और चंद्र कारोबारी हैं जबकि विक्रांत छात्र है। इस सारी साजिश को रचने वाला चंद्र है जिसका घर युग के साथ ही था। युग के पिता भी कारोबारी हैं।
यहां पहले से पुलिस ने सुरक्षा के इंतजाम कड़े कर दिए थे। कोर्ट गेट पर क्यू आर टी तैनात कर भीतर जाने पर रोक लगा दी गई। सिर्फ युग के परिवार वालों को ही परिसर में जाने दिया।
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युग की हड्डियां नगर निगम के पानी के टैंक से मिली हैं।
गेट के बाहर भीड़ जिसमें महिलाएं भी शामिल थी। उन्होंने जमकर प्रदर्शन किया, और कुछ क्यूआरटी के साथ उलझ भी गए। करीब 5:35 आरोपियों की गाड़ियों के 5:40 पर आने पर भीड़ एकदम बेकाबू होने लगी, लेकिन जवानों ने सयंम दिखाते हुए भीड़ को शांत किया। पीटने के लिए आरोपियों के पीछे दौड़ते लोग।
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युग हत्याकांड
सीजेएम की अदालत ने आरोपियों को आठ सितंबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया। इन आरोपियों के बाहर निकलने से पूर्व उनके रास्ते में पुलिस क्यूआरटी के कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए थे, जहां से आरोपियों को बड़ी वैन में कैथू जेल पहुंचाया गया।
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इस बीच उग्र परिजनों और जुटे सैकड़ों लोगों ने कोर्ट परिसर के मुख्य गेट के बाहर युग के हथियारों को फांसी दो... के नारे लगाए, किसी तरह से क्यू आरटी के जवानों ने भीड़ को काबू करने में कड़ी मशक्त करनी पड़ी। लोगों का गुस्सा इस कदर बेकाबू था कि परिसर में एंट्री बंद होने पर दूर से भीड़ ने पत्थर भी बरसाए।
- फोटो : अमर उजाला
इस बीच उग्र परिजनों और जुटे सैकड़ों लोगों ने कोर्ट परिसर के मुख्य गेट के बाहर युग के हथियारों को फांसी दो... के नारे लगाए, किसी तरह से क्यू आरटी के जवानों ने भीड़ को काबू करने में कड़ी मशक्त करनी पड़ी। लोगों का गुस्सा इस कदर बेकाबू था कि परिसर में एंट्री बंद होने पर दूर से भीड़ ने पत्थर भी बरसाए।