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पर्यावरण दिवस विशेष: एक शख्स ने अपनी उपजाऊ जमीन पर तैयार किए देवदार के 10 हजार पेड़

Tue, 04 Jun 2019 07:55 PM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला/नाहन (सिरमौर)
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नयन सिंह - फोटो : अमर उजाला
हिमाचल के कई इलाकों में अवैध कटान के मामले सामने आते रहे हैं। सरकारी अमला जंगल बचाने के नाम पर हर साल करोड़ों रुपये फूंक रहा है। वहीं सिरमौर जिले के नयन सिंह लोगों को पर्यावरण संरक्षण की सीख दे रहे हैं।
 
 
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नयन सिंह दो बार पंचायत प्रधान रहे

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पर्यावरण प्रेमी नयन सिंह - फोटो : अमर उजाला
उन्होंने अपनी उपजाऊ जमीन पर देवदार के 10 हजार पेड़ तैयार कर दिए हैं। वर्ष 1958 में पंजाब यूनिवर्सिटी से स्नातक करने के बाद उन्होंने खेतीबाड़ी को अपना पेशा बनाया। एक-एक पेड़ लगाते रहे, इस मुहिम से अपने पूरे परिवार को जोड़ा।

 
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स्नातक के बाद समझ गए थे पर्यावरण का महत्व

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नयन सिंह की ओर से तैयार जंगल - फोटो : अमर उजाला
पिछले 60 वर्षों में उन्होंने एक भी पेड़ नहीं काटा। आज राजगढ़ की शिलांजी पंचायत के कनोग गांव के इस नयन की 560 बीघा मलकीयत भूमि पर 10 हजार से अधिक लहलहा रहे देवदार के पौधे मिसाल पेश कर रहे हैं। 
 

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नयन सिंह द्वारा तैयार जंगल में उनकी पोती - फोटो : अमर उजाला
एशिया में पीच वैली के नाम से मशहूर राजगढ़ इलाके में आड़ू ही नहीं, खुमानी, सेब, प्लम और बादाम के लिए भी जलवायु अनुकूल है। नकदी फसलें उगाकर अपनी आर्थिकी बढ़ाने के बजाय उन्होंने देवदार का जंगल उगाने को तरजीह दी।
 
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नयन सिंह द्वारा तैयार जंगल - फोटो : अमर उजाला
नयन सिंह दो बार पंचायत प्रधान रहे। इस दौरान भी पर्यावरण बचाने के लिए उन्होंने पंचायत के विभिन्न क्षेत्रों में 100 से अधिक जल संग्रहण टैंक बनवाए और लोगों को जागरूक करते रहे। 



 
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नयन सिंह का बेटा और बहु - फोटो : अमर उजाला
पर्यावरण प्रेमी नयन सिंह की इस मुहिम को प्रोत्साहित करने की सरकार ने अभी तक जहमत नहीं उठाई। हालांकि, वन विभाग की तरफ से एसएमएएस कार्यक्रम के तहत इन्हें निशुल्क पौधे और बाड़ के लिए तार का भी प्रावधान करने की बात कही गई है। 
 
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नयन सिंह द्वारा तैयार जंगल - फोटो : अमर उजाला
1958 में पीयू से स्नातक करने के बाद नयन सिंह आराम से नौकरी पा सकते थे। लेकिन उन्होंने खेतीबाड़ी को चुना और पौधे लगाने में लग गए। 92 साल के नयन सिंह अभी भी खेती-बाड़ी में सक्रिय भागीदारी करते हैं। 

 
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नयन सिंह का बेटा, बहु और पोती - फोटो : अमर उजाला
उनके दो बेटे राजेंद्र और वीरेंद्र और पोते-पोतियां भी इस मुहिम में जुड़े हैं। देवदार के जंगल के अलावा वे चीड़ का जंगल तैयार कर रहे हैं। इसके लिए उन्होंने खुद अपनी नर्सरी लगाई हुई है। डीएफओ राजगढ़ मृत्युंजय माधव ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से नयन सिंह का काम सराहनीय है। उनसे अन्य लोगों को भी प्रेरणा लेनी चाहिए। 
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