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#KabTakNirbhaya: शिक्षा और कानून प्रणाली में बदलाव से रुकेगा महिला उत्पीड़न

Tue, 03 Dec 2019 05:03 PM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मंडी
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- फोटो : अमर उजाला
अब शिक्षा और कानून प्रणाली में बदलाव की जरूरत है। स्कूलों में सेक्स एजुकेशन दी जानी चाहिए। दरिंदगी के खिलाफ सख्त कानून होने चाहिए। सजा भी तुरंत मिले और ऐसी सजा मिले कि आरोपी की रूह कांप जाए यानी कोई भी अपराध करने से पहले सौ बार सोचे।  मंगलवार को अमर उजाला के ‘कब तक निर्भया’ संवाद में महिलाओं, छात्राओं और पार्षदों ने बेबाकी से विचार रखे। अब बच्चों को घर में भी संस्कार देने की जरूरत है। कहा कि न जाने कितनी निर्भया को दरिंदों ने दुष्कर्म के बाद मौत के घाट उतार दिया होगा। कुछ ही मामले सार्वजनिक हो पाते हैं। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा प्रणाली में बदलाव की जरूरत है। सेक्स एजुकेशन को बढ़ाने के साथ-साथ स्कूलों में सेल्फ डिफेंस की तकनीक और स्पोर्ट्स विषय अनिवार्य करना होगा। इससे मानसिक और शारीरिक रूप से लड़कियां हर चुनौती का सामना कर सकेंगी। स्कूलों के अध्यापकों के साथ-साथ अभिभावकों को बच्चों में संस्कार, एक दूसरे के सम्मान का पाठ पढ़ाना होगा। कानून में अहम बदलाव और न्यायपालिकाओं में न्यायाधीशों के रिक्त पदों को भरना होगा ताकि कोर्ट में इस तरह के लंबित मामले खत्म हो सकें। सजा का तरीका सार्वजनिक और कड़ा चुनना होगा, ताकि दुष्कर्म की सोच दरिंदों के जहन में न आए। 
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शिक्षा में बदलाव की जरूरत
दुष्कर्म की घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए पहले आने वाली पीढ़ी की प्रवृति में बदलाव लाना जरूरी है। यह तभी संभव हो सकता है जब शिक्षा में बदलाव लाया जाए। स्कूल में लड़कों और लड़कियों के बीच कोई लकीर नहीं खिंची जानी चाहिए। कानून में भी बदलाव लाना जरूरी है। बेटियों के साथ अगर गलत होता है तो उन्हें शिकायत करने दें, रोकें नहीं। -रिद्धि, डीएवी सीपीएस की छात्रा
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गलत होने पर खुलकर आएं सामने
सरकारी और निजी स्कूलों में सेक्स एजुकेशन को बढ़ावा देने की जरूरत है ताकि स्टूडेंट एक दूसरे के जेंडर को जाने और फर्क समझें। क्या भला है क्या बुरा है, इसकी पहचान करें। छेड़छाड़ के मामलों में पीड़िता को आगे आना चाहिए। लड़कों को भी स्कूल में ही एजुकेट किया जाना चाहिए। महिला के साथ गलत होने पर खुल कर सामने आना होगा। -अकांक्षा कटोच, दसवीं की छात्रा

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दायरे में रहना सिखाएं
लड़कियां अपने को किसी से अलग न समझें। हम अगर लड़कियों को ऐसे मामलों में जागरूक करते हैं तो लड़कों को भी जागरूक करना जरूरी है ताकि उन्हें सही गलत का फर्क मालूम हो। दुष्कर्म और हत्या जैसे जघन्य अपराधों के पीछे नशा एक मूल कारण है। लड़के और लड़कियों को फ्रेंडशिप में अपना दायरा समझना चाहिए। परिजनों को अपने बच्चों को समझाना होगा। काउंसलिंग करनी होगी। -राजेश्वरी सिंह, शिक्षिका
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स्कूलों में सेल्फ डिफेंस हो जरूरी
स्कूलों में स्पोर्ट्स और सेल्फ डिफेंस अनिवार्य होना चाहिए। इससे छात्र-छात्राओं को मानसिक और शारीरिक मजबूती मिलेगी। एक स्त्री और पुरुष में बराबरी का दर्जा नहीं मिल पाता, हमेशा से ही भेदभाव हो रहा है। इसे पाटना है। बेटों को नारी का आदर करना सिखाएं। समाज की सोच को बलना होगा। बच्चे नशेड़ी हैं तो  अभिभावकों को उनसे बात करनी पड़ेगी। समझाना होगा। -अलकनंदा हांडा, पार्षद एवं एडवोकेट
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संस्कारी बनाने होंगे बच्चे
बच्चों को संस्कारी बनाना होगा। बेटा-बेटी को समान समझते हुए दोनों को एक समान सहूलियत देनी होगी। पुरुष स्त्री का फर्क खत्म करना होगा। महिला समाज में एक प्रमुख अंग है, उसका आदर और सम्मान होना चाहिए। महिला अपने बच्चों को घर से ही अच्छे संस्कार डालें। बेटा बेटी को एक समान जीने का अधिकार होना चाहिए। सरकार नशाबंदी पर कदम उठाए। -उर्मिला शर्मा, पार्षद
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दुष्कर्म के मामलों में बने सख्त कानून
अभिभावक बेटा-बेटी में फर्क न समझें और न ही अलग-अलग व्यवहार करें। अपने छोटे और युवा बच्चों को जरूरत से ज्यादा पैसे न दें क्योंकि बच्चे इसका गलत इस्तेमाल कर नशाखोर बनते हैं। महिलाओं से हो रहे दुष्कर्म मामलों में कानून सख्त होना चाहिए। दोषियों को फांसी होनी चाहिए। इससे सभी गलत करने वाले लोगों को इस का भय बना रहेगा। -नीलम शर्मा, पार्षद 
 

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दुष्कर्म मामले में हो सख्त सजा
दुष्कर्म के मामलों में सख्त सजा का प्रावधान होना चाहिए। दोषियों को सार्वजनिक सजा होनी चाहिए ताकि ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति न हो। इसके लिए समाज को जागरूक करना होगा। सभी को एकजुट होकर आगे आना होगा ताकि इस भयानक मुद्दे पर एकजुट होकर समाज को जागरूक किया जाए। महिला की गरिमा को ठेस न पहुंचे। सबसे पहले परिवार से जागरूकता की अलख जगानी होगी। -निर्मला शर्मा, पार्षद
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घर से जागरूकता जरूरी
जागरूकता की अलख सबसे पहले घर से जगानी होगी। घर का वातावरण बेहतर और साफ होना चाहिए। पुरुष और स्त्री में जो खाई है, वह पहले भी थी, अब भी है। इसे दूर करना होगा तभी अपराधों पर अंकुश लग सकेगा।  शिक्षा और पारिवारिक वातावरण काफी अहम भूमिका निभाता है। दुष्कर्म के मामलों में सख्त कानून की जरूरत है। ताकि महिला को कोई खिलौना और इस्तेमाल की चीज न समझे।-माधुरी कपूर, पार्षद
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