कठोर परिश्रम, अनुशासन और मेहनत से देश की दूसरी मुस्लिम आईपीएस होने का गौरव हासिल करने वाली अंजुम आरा किसी पहचान की मोहताज नहीं।
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हिमाचल के जिला सोलन में एसपी के पद पर तैनात अंजुम महिला सशक्तीकरण का उदाहरण होने के साथ अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत भी हैं। लखनऊ (यूपी) के आजमगढ़ की मूल निवासी अंजुम चार भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर आती हैं। उनके पिता सिविल इंजीनियर हैं।
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उनका कहना है कि जब आईपीएस बनने की ठानी तो लोगों ने हतोत्साहित किया लेकिन पापा ने आईपीएस में भविष्य बनाने और देश सेवा करने में पूरा सहयोग दिया।
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वह मानती हैं कि पुलिस विभाग महिलाओं के लिए अच्छे कार्य क्षेत्रों में से एक है। समाज में अगर सच में बदलाव लाना चाहते हैं तो हर माता-पिता को अपनी बेटी को इस क्षेत्र के लिए प्रेरित करना चाहिए।
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कहा कि आज महिलाओं को आर्थिक तौर पर मजबूत होना बेहद जरूरी है। शिक्षा ही वह हथियार है, जिससे लड़कियों और महिलाओं को उनके अधिकारों के बारे में जानकारी मिल सकती है।
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जब वह काम पर नहीं होती है तो अपने तीन साल के बेटे के साथ समय बिताना सबसे ज्यादा पसंद करती हैं।
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कभी न भूलने वाले किस्से का जिक्र करते हुए वह बताती हैं कि एक बार एक महिला उनके पास अपने खोए हुए बेटे को तलाश करने की फरियाद लेकर आई।
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बेटा नाबालिग था, जो किसी वजह से घर से चला गया। छानबीन के बाद पता चला कि वह शिमला में कहीं बाल मजदूरी कर रहा है।
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पुलिस ने उस बच्चे को वहां से छुड़वाया और उसकी माता को सौंपा। उस समय उस मां की आंखों में अपने खोए हुए बेटे को देखकर जो चमक और खुशी दिखी, वह अनमोल थीं।