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Cancer Treatment: कैंसर के इलाज के लिए विख्यात है तिब्बती चिकित्सा पद्धति, धर्मशाला में रखी थी नींव

Wed, 14 Sep 2022 10:34 AM IST
Krishan Singh सुनील चड्ढा, धर्मशाला
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डॉ. येशी ढोंडेन ने रखी थी तिब्बती पद्धति से कैंसर के इलाज की नींव (फाइल) - फोटो : अमर उजाला
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हिमाचल प्रदेश का धर्मशाला सिर्फ तिब्बती धर्मगुरु दलाईलामा के निवास स्थान के लिए ही नहीं बल्कि तिब्बती पद्धति के जरिये कैंसर जैसे रोग के इलाज के लिए दुनिया भर में विख्यात है। दुनिया भर में कैंसर से पीड़ित कई लोग धर्मशाला में इलाज करवाने के लिए तिब्बती क्लीनिकों में आते हैं। हालांकि, तिब्बती पद्धति से उपचार करवाने वाले मरीजों का भी अपना-अपना मत है। कई मरीज कहते हैं कि उनका कैंसर एलोपैथी के बजाय तिब्बती पद्धति से ठीक हो गया जबकि कई का कहना है कि इस पद्धति से उन्हें कोई स्वास्थ्य लाभ नहीं हुआ। तिब्बती पद्धति से कैंसर का इलाज करने वाले पद्मश्री डॉ. येशी ढोंडेन का कुछ अरसा पहले ही 94 साल की उम्र में निधन हो गया था। उनके पास दुनिया भर से कैंसर का इलाज करवाने के लिए लोग आते थे। डॉ. येशी के मैकलोडगंज स्थित क्लीनिक में अब उनके शिष्य डॉक्टर कैंसर रोगियों का इलाज करते हैं।


 
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कैंसर का इलाज करवाने विदेशों से आए मरीज - फोटो : अमर उजाला
मरीजों को इलाज करवाने के लिए पहले टोकन लेना पड़ता है। एक, दो दिन या कई बार हफ्ते तक मरीजों को भीड़ की वजह से टोकन नहीं मिल पाता है। टोकन के लिए मरीजों को काफी इंतजार करना पड़ता है। डॉ. येशी का क्लीनिक  तिब्बतीयन हरबल क्लीनिक अशोका निवास मैक्लोड़गंज धर्मशाला के नाम से है। इसके अलावा स्वर्गीय डॉ. येशी के एक और शिष्य डॉ. कल्सन धर्मशाला के पास सुधेड़ गांव में क्लीनिक चलाते हैं। यहां भी कैंसर रोगियों की रोजाना काफी भीड़ होती है। यहां भी मरीजों के इलाज के लिए टोकन सिस्टम है। इसके अलावा तिब्बतियन आर्ट एंड क्राफ्ट संस्थान नोरबलिंगा में भी एक तिब्बती डॉक्टर तिब्बती चिकित्सा पद्धति से कैंसर रोगियों का इलाज करते हैं।
 
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तिब्बतियन संस्थान में मरीज। - फोटो : अमर उजाला
डॉक्टर ऐसे लगाते के कैंसर का पता
कैंसर रोगी को इलाज के लिए पहले टोकन लेना पड़ता है। डॉक्टर मरीज का पेशाब चेक करके कैंसर रोग के प्रसार का पता लगाता है। इसके बाद मरीज को तिब्बती आयुर्वेद की दवा दी जाती है। अगर कोई मरीज धर्मशाला आने में 
असमर्थ हो तो अभिभावक भी मेडिकल चेकअप रिपोर्ट और पर्ची दिखाकर दवा ले  सकता है। लेकिन अभिभावक को मरीज का पेशाब साथ लाना जरूरी होता है।
 

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डॉ. येशी ढोढेन (फाइल) - फोटो : अमर उजाला
कौन थे तिब्बति चिकित्सा पद्धति की नींव रखने वाले डॉ. येशी ढोढेन
दिवंगत डॉ. येशी ढोढेन ने धर्मशाला में कैंसर के इलाज के लिए तिब्बती चिकित्सा पद्धति की नींव रखी थी। डॉ. येशी बौद्ध भिक्षु थे। येशी वर्ष 1960 से लेकर 1980 तक तिब्बती धर्मगुरु दलाईलामा के निजी चिकित्सक रहे। येशी दलाईलामा के साथ ही तिब्बत से भागकर भारत में आए थे।
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डॉ. येशी पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित गया था। - फोटो : अमर उजाला
उन्होंने धर्मशाला में निर्वासित तिब्बत सरकार में तिब्बतियन मेडिकल एंड एस्ट्रो इंस्टीट्यूट की स्थापना कर तिब्बती चिकित्सा पद्धति को आगे बढ़ाया। डॉ. येशी को भारत सरकार ने उनकी तिब्बती आयुर्वेद पद्धति में हासिल की गई उपलब्धियों के कारण पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया था।
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