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ऋषि जमदग्नि की तपोस्थली में हजारों ने लगाई आस्था की डुबकी, जानिए क्या है पौराणिक मान्यता

Tue, 15 Jan 2019 10:16 AM IST
ashok chauhan न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कुल्लू/करसोग/तत्तापानी (मंडी)
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मकर संक्रांति पर्व पर सोमवार को देवभूमि हिमाचल में हजारों श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। कुल्लू में धार्मिक नगरी मणिकर्ण, वशिष्ठ और क्लाथ में कड़ाके की ठंड के बीच हजारों लोगों ने गरम पानी के स्रोत में स्नान किया। वहीं, मंडी में ऋषि जमदग्नि की तपोस्थली तत्तापानी में सोमवार को पांच हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने गरम पानी के चश्मे में डुबकी लगाई। 
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मकर संक्रांति पर धार्मिक महात्म्य के स्नान के लिए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर भी तत्तापानी पहुंचे। उन्होंने तत्तापानी के होटल हॉट स्प्रिंग के स्विमिंग पूल में पवित्र डुबकी लगाकर पहली बार जिलास्तरीय मेले का विधिवत शुभारंभ किया। इसके बाद भंडारे में सीएम ने पारंपरिक खिचड़ी का स्वाद चखा। मुख्यमंत्री ने तत्तापानी में प्रसिद्ध नरसिंह मंदिर और शनि देव मंदिर का दौरा किया और पूजा की।
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तत्तापानी में बांध बनने से पहले प्राकृतिक गर्म पानी के चश्मे हुआ करते थे, जहां श्रद्धालु स्नान व दान का महत्व मानते थे। प्राकृतिक चश्मे डूब गए हैं, लेकिन आस्था में कोई कमी नहीं हुई है। सरकार व प्रशासन के प्रयासों से जो कृत्रिम चश्मे बनाए गए हैं, अब वहां पर श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाते हैं। मान्यता है कि यहां स्नान करने से ग्रहों की शांति मिलती है। यहां स्नान करने से चर्म रोगों से भी मुक्ति मिलती है। इसके अलावा यहां तोला दान का बड़ा महत्व है। ग्रहों की शांति के लिए यहां दूर-दूर से श्रद्धालु आकर तुलादान करते हैं।

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तत्तापानी में गर्म पानी के चश्मों की उत्पत्ति के बारे में तरह-तरह की किंवदंतियां प्रसिद्ध हैं। पुराणविद्धों के अनुसार ततापानी के बारे में एक किंवदंती ये है कि प्राचीनकाल में इस क्षेत्र में परशुराम के पिता ऋषि जमदग्नि तपस्या कर रहे थे।
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इस तपोस्थली में गर्म पानी के चश्मे प्रकट किए। एक अन्य किंवदंती ये भी है कि यहां पर जमदग्नि ऋषि के पुत्र परशुराम स्नान कर रहे थे। उन्होंने जब अपने वस्त्र निचोड़े तो यहां पर गर्म पानी हो पैदा हो गया। यहां गंधक के पहाड़ हैं। इनसे गैस बनती है, उनसे भी गर्म पानी निकलता है।
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मकर संक्रांति पर श्रद्धालु जगह जगह खिचड़ी और घी का भंडारा लगाते है। तेल के तलुवे के साथ इस तीर्थ स्थल पर मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता था। पवित्र स्थल तत्तापानी में तीन बार स्नान करके राहु की दशा को शांत कराया जाता था। प्रथम स्नान के बाद पांडे लोगों को काले कपड़े पहनने को देते हैं। इन काले कपड़ों में लोगों से राहु का पूजन कराया जाता था।
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इसके बाद ग्रह के मारे व्यक्ति को अनाज, लोहा, माश की दाल, सरसों के तेल के साथ तोला जाता है। पूजा होने के बाद फिर व्यक्ति से स्नान कराया जाता है। इसके बाद पंडित लोगों से सूर्य देव की पूजा कराते हैं। पंडितों के मुताबिक ऐसा करने से राहु की दशा शांत हो जाती है। तुलादान के दौरान काले कपड़े, अनाज लोहा, माश की दाल और सरसों पांडे लेते हैं जबकि पंडितों को सिर्फ मंत्र उच्चारण की दक्षिणा लेते हैं। तत्तापानी में 100 के करीब तुलादान के पंडाल लगे होते थे। प्रति पंडाल में एक पांडा और एक पंडित होता था, जो लोगों के ग्रहों को शांत कराते थे। 

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तत्तापानी में मकर संक्रांति मेले का शुभारंभ करने पहुंचे मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि पर्यटन मानचित्र पर तत्तापानी और उभारा जाएगा। गर्म पानी के चश्मों को संरक्षित किया जाएगा। इस दिशा में सरकार कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने तत्तापानी में सतलुज किनारे घाटों के निर्माण की आधारशिला रखी, जिसे एनटीपीसी की ओर से प्रायोजित किया जाएगा।
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इसके निर्माण पर 123 लाख रुपये की लागत आएगी। सीएम ने सतलुज नदी तट के सौंदर्यीकरण और संरक्षण कार्यों का शिलान्यास भी किया। सीएम ने कहा कि पिछली राज्य सरकार के वित्तीय कुप्रबंधन के कारण वर्तमान सरकार को 46,500 करोड़ रुपये का ऋण भार विरासत में मिला है। इस स्थिति से निपटने के लिए प्रदेश सरकार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार कई परियोजनाओं का क्रियान्वयन केंद्रीय निधि से कराएगी।
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