इसके बाद ग्रह के मारे व्यक्ति को अनाज, लोहा, माश की दाल, सरसों के तेल के साथ तोला जाता है। पूजा होने के बाद फिर व्यक्ति से स्नान कराया जाता है। इसके बाद पंडित लोगों से सूर्य देव की पूजा कराते हैं। पंडितों के मुताबिक ऐसा करने से राहु की दशा शांत हो जाती है। तुलादान के दौरान काले कपड़े, अनाज लोहा, माश की दाल और सरसों पांडे लेते हैं जबकि पंडितों को सिर्फ मंत्र उच्चारण की दक्षिणा लेते हैं। तत्तापानी में 100 के करीब तुलादान के पंडाल लगे होते थे। प्रति पंडाल में एक पांडा और एक पंडित होता था, जो लोगों के ग्रहों को शांत कराते थे।