भारतीय रेलवे का 108 साल पुराना इतिहास ‘स्टीम लोकोमोटिव इंजन’ एक बार फिर ट्रैक पर दौड़ा। ट्रायल के लिए स्टीम इंजन को शिमला कालका हैरिटेज ट्रैक पर चलाया गया।
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108 साल पुराने इंजन की 'छुक छुक' से गूंजा हैरिटेज ट्रैक
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उत्तर रेलवे के एजीएम की देखरेख में केसी-520 स्टीम इंजन का सफल ट्रायल किया गया। जब इंजन शिमला रेलवे स्टेशन पर पहुंचा तो रेल का पर्याय माने जाने वाली छुक-छुक की आवाज चारों तरफ गूंज उठी। इन ऐतिहासिक पलों को हर किसी ने अपने कैमरे में कैद कर लिया।
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हरे भरे जंगलों और ऊंचे पहाड़ों के बीच से होकर निकलने वाले शिमला कालका रेलवे ट्रैक को यूनेस्को द्वारा वर्ल्ड हैरिटेज की श्रेणी में शामिल किया गया है।
108 साल पुराने इंजन की 'छुक छुक' से गूंजा हैरिटेज ट्रैक
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108 साल पुराना है केसी-520 स्टीम लोकोमोटिव इंजन को 1905 में अंग्रेजों ने शिमला से कैथलीघाट के बीच चलाया पहली बार चलाया था।
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1971 के बाद स्टीम इंजन को बंद कर दिया गया। इसके बाद यह 30 सालों तक वर्कशॉप में खड़ा रहा।
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2001 में दोबारा बनाकर तैयार किया गया। स्टीम इंजन का वजन 41 टन है और इसकी 80 टन तक खींचने की क्षमता है।
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इस मौके पर रेलवे का भव्य इतिहास अपने साथ पूरी सदी के सफर लेकर ट्रैक पर जीवंत होकर दौड़ पड़ा। रेल का पर्याय मानी जाने वाली छुक-छुक की आवाज स्टीम इंजन से ही निकलती है।