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25 सालों में सूना हो गया उषा का संसार, आज सब कुछ खो बैठी

Thu, 17 Jan 2019 01:54 PM IST
अरविन्द ठाकुर अरविंद ठाकुर, अमर उजाला, हमीरपुर
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घर के भीतर एक कमरे के कोने में बहन के कंधों पर बेसुध पड़ी उषा और चारों तरफ पसरा सन्नाटा। कुछ देर बार जब उषा को होश आता है तो बस होंठो पर एक ही बात। मेरा दीपू बेटा कहां गया...मेरे दीपू को ला दो...मेरे बिना अकेला कैसे रहेगा वो वहां। बेटा मुझे भी साथ ले जाता इस अभागी मां को यहां अकेला छोड़ गया.... किसके सहारे जीऊंगी मैं। अपनी एक झलक तो दिखा दे। एक बार आ जा बेटा दीपू अपनी मां की बात मान ले...बस एक बार आ जा।
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उषा के लिए अब वो बेटा कभी लौटकर नहीं आ सकता। इन अल्फाजों को सुनकर घर में सांत्वना देने आए लोगों कि आंखों से भी आंसूओं की धारा बह रही है। किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा कि उषा को सांत्वना दें तो किन शब्दों से। जिस बेटे के सहारे उषा ने अपने जीवन के 25 साल काटे आज भी वो इस दुनिया से रुखस्त हो गया।
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25 सालों में सब कुछ खो बैठी उषा- जीवन के 25 साल उषा के लिए किसी कहर से कम नहीं। गलोड़ तहसील क्षेत्र के साथ लगते ठां गांव में शादी हुई। शादी के कुछ साल बाद ही पति चल बसे। उसके बाद बेटी जब आठ साल की थी तो बीमार हुई और उसने भी दुनिया को अलविदा कह दिया।

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पति गुजरा तो बेटा दीपक मां के पेट में था। उषा ने बेटे दीपक को पाला-पोसा। अच्छा पढ़ा लिखाया। इन दिनों कसौली में एक होटल में मैनेजर के पद पर कार्यरत था। धर्मपुर-कसौली मार्ग पर घड़ी उद्योग के समीप रविवार को हुए हादसे में दीपक (25) ने मौके पर ही दम तोड़ दिया था।
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मामी और भाई भी सदमे में- उषा बचपन में अपनी मामी के घर खोरड़ गांव में रही है। वहीं से शिक्षा ली। शादी भी खोरड़ से हुई। मामी अमृत ठाकुर, भाई विपन और अशोक भी गहरे सदमे में हैं। हर वक्त खुशमिजाज रहने वाली उषा आज बेसुध पड़ी है। बहन अनिता, भांजे सुमित और अमित भी हर वक्त ढांढ़स बंधा रहे हैं।
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