आज भी मंदिर के भीतर उन दिनों के बनाए रामायण और महाभारत की कलाकृतियां देख लोग दंग रह जाते हैं। कहीं मृत्यु शैया में लेटे भीष्म पितामह, कहीं सागर मंथन, सीता मैया का हरण, अशोक वाटिका, गंगा-जमुना, आठ ग्रह, भगवान विष्णु के अवतार, भगवान शिव का तीसरा नेत्र खुलने, भगवान कृष्ण-अर्जुन, द्रोपदी स्वयंवर, अभिमन्यु का चक्रव्यूह, सहित कई देवी-देवताओं के लकड़ी के बनाए चित्र मौजूद हैं। मंदिर की लकड़ी की दीवारें पहाड़ी शैली में बनी हुई हैं। मान्यता है कि महिषासुर का वध करने के बाद मां काली ने यहीं पर खून से भरा हुआ खप्पर रखा था। यह खप्पर आज भी यहां माता काली की मुख्य मूर्ति के पीछे रखा हुआ है। इसे श्रद्धालुओं के देखने पर प्रतिबंध है। लोगों में आस्था है कि अगर इस खप्पर को कोई गलती से भी देख ले तो वह अंधा हो जाता है।