हलोग धामी के इस पत्थर के खेल मेले का करीब चार सौ साल पुराना इतिहास है। लोगों की इसमें अटूट आस्था है। मान्यता है कि पहले यहां नर बलि दी जाती थी। इसको रोकने के लिए इस रिसायत की रानी ने नर बलि की जगह इस पत्थर के खेल की परंपरा को शुरू किया। खेल का चौरा में रानी का चबूतरा भी बनाया गया है। धामी के उत्तराधिकारी जगदीप सिंह और देव कुरगण कमेटी के अध्यक्ष भगत राम, सचिव लेख राम वर्मा, कोषाध्यक्ष रणजीत सिंह कंवर ने बताया कि तीन बजे खेल शुरू हुआ था। इसके बाद करीब 15 मिनट तक खेल चला और पत्थर लगने की सूचना मिलने पर ही खेल रोक दिया था। यह देव आस्था से जुड़ा खेल है, इसलिए लोगों की आस्था के चलते ही इसे आगे बढ़ाया जा रहा है।