हादसे में घायल लोकेंद्र।
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देखते ही देखते घर श्मशान में बदल गया
कविता पत्नी लोकेंद्र अपने पति और तीन बच्चों कृतिका (5), सारिका (13) और कृतिक (3) के साथ आई थीं। वहीं तृप्ता पत्नी नरेश अपने पति और बेटे सूजल के साथ मां के घर माघी मना रही थीं। रात करीब ढाई बजे इंद्रा देवी की नींद टूटी। उन्होंने कमरे से धुआं उठते देखा। घबराकर वह बाहर निकलीं और शोर मचाने लगीं, लेकिन तब तक आग ने पूरे मकान को अपनी चपेट में ले लिया था। मां ने मदद के लिए दौड़ लगाई, चीखी-चिल्लाई, लेकिन आग इतनी तेजी से फैली कि उन्हें अपनी बेटियों, दामाद और नातियों को बाहर निकालने का एक पल भी नहीं मिला। मकान में रखे गैस सिलिंडर फट गए, जिससे आग और विकराल हो गई। देखते ही देखते घर श्मशान में बदल गया।