754 वर्ग किलोमीटर फैले बर्फ से ढके और जंगली जानवरों से भरे इस पहाड़ी इलाके को गांव के सारे लोग छोड़कर चले गए। मगर 83 साल की ये महिला आज भी यहां रहती है। महिला आए दिन मौत को मात देती है। इसकी कहानी आपका भी दिल छू लेगी। जानते हैं पूरी कहानी-
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83 साल की इस महिला का नाम है चतरी देवी। महिला का पुराना घर खूंखार जंगल से घिरा पड़ा है। यहां न तो बिजली है और न ही मोबाइल का सिग्नल। घर के लिए थोड़ा सा सामान भी खरीदना हो तो दर्जनों किलोमीटर दूर बाजार पैदल जाना पड़ता है। मगर महिला घर छोड़ने को राजी नहीं।
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ऐसा नहीं है कि महिला का कोई रिश्तेदार नहीं है। इसके तीन बेटे हैं जिन्होंने इस एरिया से दूर अपना घर बना लिया है। मगर चतरी उनके साथ नहीं रहती। कड़ाके की ठंड और खूंखार जंगली जानवरों का खौफ भी इसकी जिद के आगे हार मान लेता है।
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चतरी देवी हिमाचल स्थित ग्रेट हिमालयन पार्क में रहती है। 1999 में पार्क घोषित होने के बाद यहां लोगों को दूसरी जगह जमीन देकर बसा लिया गया। मगर चतरी घर छोड़ने को राजी न हुई। उसे जमीन से लेकर पैसे तक का ऑफर दिया गया मगर वह न मानी।
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इसका कहना है कि जिस घर में उसके पति ने अंतिम सांस ली, वह भी वहीं दम तोड़ेगी। वह अपना घर किसी कीमत पर नहीं छोड़ेगी। अफसर भी उसकी जिद के आगे हार मानने लगे हैं। आए दिन महिला के आंगन में तेंदुए, भालू समेत कई खूंखार जानवर आ जाते हैं लेकिन चतरी ये घर नहीं छोड़ना चाहती। घर के आसपास पति ने कुछ खेत बनाए थे जिसमें चतरी काम भी करती है।
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2014 में इस पार्क को हैरिटेज का भी दर्जा मिल गया जिसके बाद यहां लोगों के बसने पर पूर्ण पाबंदी लग गई। चतरी कहती है कि उसे जानवरों का खौफ नहीं है। वो अपने रास्ते जाते हैं और मैं अपने। मैं उनका भोजन नहीं हूं।
इस पार्क में बर्फानी तेंदुए समेत कुल 31 जानवरों की प्रजातियां रहती हैं। चतरी को अपने घर खेत खलियान से इतना प्यार है कि वह अकेले ही उम्र के इस पड़ाव पर भी इसे नहीं छोड़ना चाहती।