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महादेव के दर्शन के लिए सबसे कठिन 35 किमी यात्रा, फूंक-फूंक कर रखना पड़ता है कदम

Sat, 14 Jul 2018 01:27 PM IST
रोशन ठाकुर/ रामस्वरूप ठाकुर, अमर उजाला, कुल्लू/आनी
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सबसे कठिन यात्राओं में शुमार श्रीखंड महादेव यात्रा रविवार 15 जुलाई से शुरू होगी। यह 31 जुलाई तक होगी। 18570 फीट ऊंचाई पर स्थित श्रीखंड महादेव के दर्शन के लिए यात्रियों को 35 किलोमीटर का पैदल सफर करना पड़ता है। ग्लेशियरों से होकर गुजरने वाला यह रास्ता बेहद जोखिम भरा है। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को 25 किलोमीटर की सीधी चढ़ाई चढ़नी पड़ती है। हर वर्ष देश-विदेश के श्रद्धालु श्रीखंड यात्रा पर जाते हैं।
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उधर, जिला प्रशासन का दावा है कि इस साल श्रीखंड महादेव यात्रा सुरक्षित होगी। प्रशासन ने 32 किलोमीटर लंबे रास्ते को लोनिवि के साथ वन विभाग की मदद से चकाचक किया है। 15 से 31 जुलाई तक चलने वाली ऐतिहासिक यात्रा में इस बार पुलिस की एक बटालियन के साथ होमगार्ड के 25 जवान तैनात किए जाएंगे। 
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15 जुलाई सुबह देवविधि से सिहंगाड़ से यात्रा का शुभारंभ होगा। श्रद्धालुओं को किसी तरह की समस्या न हो, इसके लिए जिला प्रशासन और श्रीखंड ट्रस्ट ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। आपातकालीन स्थिति से निपटने को एक टीम तैनात की गई है। एक रेस्क्यू वाहन भी रखा है। डॉक्टरों की एक टीम 17 दिन तक यहां रहेगी। सभी यात्रियों का पंजीकरण के साथ स्वास्थ्य जांचा जाएगा। इसके बाद ही श्रद्धालुओं को श्रीखंड भेजा जाएगा।

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सिंहगाड़, थाचडू, कालीघाट, भीमडवार, पार्वतीबाग, नयन सरोवर आदि मनमोहक व आकर्षित स्थलों से होकर गुजरने वाली श्रीखंड यात्रा के दौरान रास्ते में ढाबे और लंगरों में बने खाने की रोजाना गुणवत्ता जांची जाएगी।
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यात्रा वाली जगहों पर साफ पानी मिले, इसके लिए नई पाइप लाइनों को जोड़ा गया है। ात्रियों को अपने साथ गर्म कपड़े, मोटी जुराबें, टॉर्च, डंडा और जरूरी दवाएं साथ रखनी जरूरी हैं जो आपात स्थिति में यात्रियों के काम आएंगी। उपायुक्त कुल्लू एवं श्रीखंड यात्रा ट्रस्ट के अध्यक्ष यूनुस ने कहा कि श्रीखंड यात्रा 15 से 31 जुलाई तक चलेगी।
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श्रीखंड यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए एचआरटीसी बसों के साथ टैक्सियों की मदद ली जाएगी। निगम की बसों और टैक्सियों से भक्तों को श्रीखंड जाने वाले रास्ते तक बनी सड़क तक पहुंचाया जाएगा। श्रद्धालुओं की मदद के लिए श्रीखंड ट्रस्ट ने स्थानीय महिला और युवक मंडलों को शामिल किया है। इस दौरान बेहतरीन काम करने वाले महिला व युवक मंडल को 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस पर 10-10 हजार रुपये का ईनाम दिया जाएगा।
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पांडवों ने भीमडवारी में काटा था कुछ समय- दंतकथा के अनुसार पांडवों ने भी कुछ समय यहां बिताया था। इसके साक्ष्य यहां भीमडवारी में मिलते हैं। भीम ने बड़े-बड़े पत्थरों को काटकर यहां स्थापित किया था। इन शिलाओं पर कुछ लेख भी उकेरे गए हैं। उन्होंने यहां एक राक्षस को भी मारा था, जो यहां आने वाले भक्तों को मार देता था।

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राक्षस का रक्त जब गिरा तो पूरी जमीन लाल हो गई। आज भी दूर से देखने पर यहां की जमीन और पानी लाल रंग का दिखता है। कहा जाता है भीम ने स्वर्ग जाने के लिए सीढ़ियां बनाने के लिए इन विशालकाय पत्थरों को तोड़ा था, मगर समय की कमी के कारण सीढ़ियां पूरी नहीं बन पाईं। भीमडवारी पहुंचने के बाद रात के समय यहां कई प्रकार की जड़ी-बूटियां चमक उठती हैं। भक्तों का दावा है कि यहां संजीवनी बूटी भी मौजूद है।
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शिमला से रामपुर की दूरी -130 किमी
रामपुर से निरमंड की दूरी -17 किलोमीटर
निरमंड से बागीपुल की दूरी -17 किलोमीटर
बागीपुल से जाओ की दूरी -12 किलोमीटर
जाओ से श्रीखंड महादेव - 35 किमी पैदल
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