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चमत्कारी शिवलिंग, यहां से खाली हाथ लौट गए थे यमराज

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ये वही पवित्र शिवलिंग है जहां भगवान शिव ने अपना चमत्कार दिखाया था। ऐसा चमत्कार जिसके बाद यमराज को भी खाली हाथ यहां से वापस लौटना पड़ा था। कहानी 12 साल के उस बच्चे से जुड़ी है जो बाद में अमर हो गया था।

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चमत्कारी शिवलिंग, यहां से खाली हाथ लौट गए थे यमराज

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कहा जाता है कि विष्णु भगवान की तपस्या करने के बाद मृकंडू ऋषि को एक पुत्र की प्राप्ति हुई थी। मगर वरदान देते वक्त भगवान ने कहा था कि इस बालक की उम्र सिर्फ 12 साल होगी। इसके बाद इसकी मृत्यु हो जाएगी।

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अत: इस वरदान के फलस्वरूप मारकंडे ऋषि का जन्म हुआ। होश संभालते ही उन्हें पता चल गया कि उनका जीवन लंबा नहीं है। इसीलिए उन्होंने भगवान शिव की तपस्या शुरू कर दी।

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अमरता प्राप्त करने की लिए उन्होंने भगवान भोलेनाथ की तपस्या में निरंतर महामृत्युन्ज्य मन्त्र का जाप किया।

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भगवान विष्‍णु के वरदान के अनुसार 12 साल की आयु पूरा होने के बाद यमराज उनके प्राण लेने आए।
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कहते हैं कि मारकंडे ऋषि ने यहां रखे शिवलिंग को बाहों में भर लिया और घोर तप शुरू कर दिया।
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जैसे ही यमराज मारकंडे ऋषि के प्राण हरने लगे कि भगवान शिव साक्षात प्रकट हो गए। उन्होंने मारकंडेय ऋषि को अमरता दी और यहां से मारकंडे नदी का उद्गम हुआ।
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कहते हैं कि यहां मांगी गई हर मनोकामना पूर्ण होती है। यहां पूरे साल भक्तों का तांता लगा रहता है। पौड़ीवाला हिमाचल के नाहन से 6 किलोमीटर की दूरी पर नाहन चंडीगढ़ मार्ग पर स्थित है।
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